लाहौर: पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव की घटनाएं आम हैं। दशकों से अहमदिया समुदाय के लोगों को यहां प्रताड़ित किया जाता रहा है। कभी कट्टरपंथी इनकी मस्जिदों को निशाना बनाते हैं तो कभी समुदाय से जुड़े लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। अब एक बार फिर पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने जाहिलियत दिखाई है और अहमदिया अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को कई शहरों में ईद की नमाज अदा करने से रोका है।
पंजाब में पुलिस ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के दौरान पशुओं की कुर्बानी देने का प्रयास करने के आरोप में अहमदिया समुदाय के 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 3 अन्य लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान (JAP) ने दावा किया है कि कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने भी 2 अहमदिया लोगों को अपनी धार्मिक मान्यता को त्यागने के लिए मजबूर किया है।
बता दें कि, हाल के महीनों में, धार्मिक कट्टरपंथियों ने लगातार अहमदिया समुदाय के सदस्यों को टरगेट किया है। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के अनुसार, अहमदिया लोगों को खुशाब, मीरपुर खास, लोधरान, भक्कर, राजनपुर, उमरकोट, लरकाना और कराची में ईद की नमाज अदा करने से रोका गया है। इतना ही नहीं लाहौर के सबसे पुराने अहमदी उपासना स्थल गरी शाहू में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और पुलिस से इसे सील करने की मांग की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अहमदिया उपासना स्थल को सील कर दिया है।

पाकिस्तान की कुल आबादी लगभग 25 करोड़ है, जिसमें अहमदिया समुदाय के लोगों की संख्या करीब 5 लाख बताई जाती है। हालांकि, कुछ स्रोतों के अनुसार उनकी संख्या 40 लाख तक हो सकती है, जो कुल आबादी का लगभग 2.2 फीसदी है। 2018 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने बताया था कि अहमदिया वोटर्स की संख्या 1.67 लाख थी। पाकिस्तान में उनकी आबादी में कमी देखी गई है, क्योंकि कई अहमदिया हिंसा और भेदभाव के कारण देश छोड़कर जा चुके हैं।
अहमदिया समुदाय एक धार्मिक आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1889 में मिर्जा गुलाम अहमद ने ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के कादियान (वर्तमान में भारत) में की थी। यह इस्लाम के भीतर एक सुधारवादी संप्रदाय के रूप में शुरू हुआ। अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुसलमान मानते हैं और इस्लाम के 5 मूल सिद्धांतों नमाज, रोजा, जकात, हज, और तौहीद का पालन करते हैं। हालांकि, अहमदिया समुदाय की कुछ मान्यताएं मुख्यधारा के सुन्नी और शिया मुसलमानों से अलग हैं। अहमदिया मिर्जा गुलाम अहमद को अंतिम पैगंबर मानते हैं। अहमदियों का यही विश्वास मुख्यधारा के मुसलमानों के बीच विवाद का मुख्य कारण है जो पैगंबर मुहम्मद को अंतिम पैगंबर मानते हैं। (भाषा)
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