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ढाका के शहीद मीनार पर छात्रों का आज फिर जमावड़ा, क्या बदला जाएगा बांग्लादेश का नाम और संविधान?

 Published : Dec 31, 2024 07:28 am IST,  Updated : Dec 31, 2024 07:37 am IST

संवैधानिक सुधारों के लिए अपनी मांगों को लाखों लोगों के इकट्ठा होने की संभावना है। छात्र विश्वविद्यालय परिसरों, सुहरावर्दी उद्यान जैसे सार्वजनिक चौराहों और शाहभाग स्क्वायर जैसे प्रमुख चौराहों पर या उसके आसपास सभाएं आयोजित कर सकते हैं।

ढाका के शहीद मीनार पर छात्रों का आज फिर जमावड़ा- India TV Hindi
ढाका के शहीद मीनार पर छात्रों का आज फिर जमावड़ा Image Source : FILE-ANI

ढाकाः बांग्लादेश में जिन छात्रों ने शेख हसीना का तख्तापलट कर उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। आज वही छात्र ढाका के शहीद मीनार पर इकट्ठा होने जा रहे हैं। छात्रों का मकशद देश का संविधान बदलना है। जानकारी के अनुसार, करीब 30 लाख छात्र आज ढाका में जुटने वाले हैं। छात्रों के आगे मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार भी घुटने टेकते नजर आ रही है। संगठन के सदस्य सचिव आरिफ सोहेल ने कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आम जनता से इसमें भाग लेने का आग्रह किया।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी छात्र शाम तीन बजे ढाका के शहीद मीनार पर जुट सकते हैं। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच विवाद संभव है। पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस या पानी की बौछारों का इस्तेमाल कर सकती है।

बदला जा सकता है बांग्लादेश का नाम

दावा किया जा रहा है कि संविधान बदलने से पहले बांग्लादेश का नाम बदला सकता है। छात्र संगठन देश का नया नाम इस्‍लामिक रिपब्‍ल‍िक ऑफ बांग्‍लादेश, इस्‍लामिक ऑफ बांग्लादेश और इस्‍लामिक रिपब्‍ल‍िक ऑफ ईस्‍ट पाक‍िस्‍तान में से कोई एक नाम रखना चाह रहे हैं। सबसे ज्यादा संभवना यह है कि नाम बदलने की सूरत में इस्‍लामिक रिपब्‍ल‍िक ऑफ बांग्‍लादेश के नाम पर सहमति बन सकती है। 

सरकार और आंदोलनकारी छात्रों में नहीं बनी सहमति

बांग्लादेशी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा कि देश में शरिया कानून लागू किया जा सकता है। मुहम्मद युनूस को नया राष्ट्रपति घोषित किया जा सकता है। आर्मी चीफ और देश के राष्ट्रपति से इस्तीफा मांगा जा सकता है ताकि छात्र अपने मनमुताबिक देश का नया संविधान लागू करवा सकें। इससे पहले राष्ट्रीय नागरिक समिति के कई नेताओं और छात्रों के बीच बैठक हुई। सरकार ने छात्रों को प्रदर्शन न करने को कहा। हालांकि छात्र संगठन प्रदर्शन करने पर अड़े हुए हैं। 

 

 

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