मॉस्कोः रूस ने विश्व भर के वैज्ञानिकों को चौंकाते हुए एक ऐसी सबसे खतरनाक मिसाइल का परीक्षण करने का दावा किया है, जिसके टारगेट से अब दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं रह गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने खुद इस खतरनाक क्रूज परमाणु मिसाइल के बारे में दुनिया को बताया है। यह मिसाइल इतनी ज्यादा खतरनाक है, जो धरती, पाताल और आकाश ही नहीं, ब्रह्मांड के भी गुप्त ठिकानों को भेद सकती है। रूस की इस मिसाइल ने अमेरिका से लेकर यूरोप तक ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है।
रूस ने अपनी इस सबसे खतरनाक मिसाइल का नाम "बुरेवेस्टनिक" रखा है, जो कि असीमित रेंज वाली अद्वितीय परमाणु ऊर्जा संचालित है। पुतिन ने रविवार को "बुरेवेस्टनिक" क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण की घोषणा की। साथ ही रूसी राष्ट्रपति ने अपने सशस्त्र बलों को इसकी तैनाती के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने का आदेश दे दिया। पुतिन के इन इरादों ने गोलार्ध में हड़कंप मचा दिया है। पुतिन ने अपने ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ और अन्य सैन्य कमांडरों के साथ इसकी लांचिंग के बाद अहम बैठक में बताया कि हाल में परमाणु शक्तियों के अभ्यास के दौरान "बुरेवेस्टनिक" क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया, जो 15 घंटे तक हवा में रही।
रूस की "बुरेवेस्टनिक" मिसाइल असीमित दूरी तक के टारगेट को भेदने की क्षमता रखती है। खास बात यह है कि यह किसी भी तरह के गुप्त ठिकानों को भी खोजकर उसे उड़ा सकती है। ऐसे में अमेरिका के भी गुप्त मिसाइल ठिकाने अब असुरक्षित हो गए हैं। अपने सफल परीक्षणों के दौरान "बुरेवेस्टनिक" ने 14,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। हालांकि रूस ने यह नहीं बताया कि इसकी अधिकतम दूरी तय करने की क्षमता क्या है। इससे पहले रूस के पास दुनिया की सबसे खतरनाक एक और मिसाइल है, जिसकी रेंज 18000 से 35000 किलोमीटर तक है।
मिसाइल परीक्षण से पहले यूक्रेन में सैन्य अभियानों का दौरा
क्रूज मिसाइल पर आयोजित इस बैठक का टेलीविजन का प्रसारण किया गया। इससे पहले रूस के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में पुतिन ने रविवार की सुबह यूक्रेन में सैन्य अभियानों के संयुक्त स्टाफ का दौरा किया और चीफ जनरल स्टाफ जनरल वालेरी गेरासिमोव के नेतृत्व में बल कमांडरों के साथ बातचीत की। गेरासिमोव ने पुतिन को दो महत्वपूर्ण दिशाओं में 10,000 से अधिक यूक्रेनी सैनिकों की घेराबंदी किए जाने के जानकारी दी। गेरासिमोव ने कहा, ‘‘31 बटालियन वाले यूक्रेनी सशस्त्र बलों के एक बड़े समूह को अवरुद्ध कर दिया गया है।
रूस की इस खतरनाक मिसाइल के आगे अब दुनिया भर के सभी संरक्षित ठिकाने भी अनसेफ हो गए हैं। अब पूरे विश्व में कोई ऐसा ठिकाना नहीं रह गया है, जिसे "बुरेवेस्टनिक" क्रूज मिसाइल भेद नहीं सकती हो। रूस की इस कामयाबी से दुनिया हैरान रह गई है। अब यूक्रेन पर पुतिन की अगली रणनीति क्या होने वाली है, इस बारे में कल्पना करके ही दुनिया में हलचल पैदा हो गई है। इस मिसाइल लांच के बारे में बताने के लिए जब क्रेमलिन के विशाल हॉल में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंच पर थे, तो उन्होंने इसका सिर्फ उतना ब्यौरा दिया, जितना की मीडिया को देना चाहते थे। इस दौरान पुतिन के चेहरे पर दृढ़ मुस्कान थी, जो दुनिया को चुनौती देती प्रतीत होती है।
पुतिन "बुरेवेस्टनिक" परमाणु मिसाइल को दुनिया के सबसे बड़े रहस्य के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को हमेशा के लिए बदल देगा। ," उन्होंने कहा,"बुरेवेस्टनिक मिसाइल दुनिया में बेमिसाल है। परमाणु ऊर्जा से संचालित है। इसका दायरा बेहद असीमित हो, जो कहीं भी संरक्षित ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता रखती है। पूरी दुनिया में अभी तक इस मिसाइल कोई मुकाबला करने वाला हथियार मौजूद नहीं है। पुतिन के इस ऐलान से दुनिया में चारों ओर सन्नाटा छा गया ।
बुरेवेस्टनिक को एक'तूफानी पक्षी'भी कहा जा रहा है, जो रूस की गुप्त प्रयोगशाला से निकला था। यह रूस की दशकों की मेहनत का फल है। यह क्रूज मिसाइल परमाणु रिएक्टर से चलती है, जो इसे हवा में अनंत उड़ान भरने की ताकत देती है। पारंपरिक मिसाइलें ईंधन खत्म होने पर गिर जातीं हैं, लेकिन यह महासागर पार कर, दुश्मन के हृदय तक पहुंच सकती है। "यह संरक्षित साइट्स जैसे बंकर, ठिकाने, यहां तक कि अमेरिकी मिसाइल ढाल के खिलाफ घातक हथियार है। पुतिन के सामने स्क्रीन पर इसकी लांचिंग का वीडियो भी चलाया गया।
आकाश को चीरती हुई मिसाइल ने पूरी किया सफल परीक्षण
यह एक चांदी जैसी चमक वाली मिसाइल है, जो आकाश को चीरती हुई अपने लक्ष्य पर धमाका कर सकी। इसके बाद धुंधला धुआं हुआ और सब कुछ राख हो गया। इसके परीक्षण की आवाजों से दुनिया सिहर उठी। इसके बाद वाशिंगटन में पेंटागन के कमरों में आपात बैठकें बुलाई गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे उकसावा बताया। जबकि नाटो मुख्यालय में घंटी बज रही थी। चीन ने चुप्पी साधी, लेकिन उसके वैज्ञानिक रात-दिन काम पर लग गए। इसके बाद यूरोपीय देशों में शांति या हथियार दौड़ को लेकर बहस छिड़ गई। यह मिसाइल सिर्फ विज्ञान को ही नहीं, बल्कि मानवता को भी चुनौती दे रही थी। क्या हम इस तूफान से बच पाएंगे?
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