America-Iran Tensions: ईरान को बार-बार धमकी देने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अब बदले-बदले नजर आ रहे हैं। हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान हमसे बात कर रहा है...देखते हैं हम क्या कर सकते हैं, नहीं तो देखेंगे क्या होता है।" उन्होंने आगे कहा कि ईरान नेगोशिएट कर रहा है और अमेरिका एक बड़ा फ्लीट भी भेज रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर था, जिसमें सैन्य हमले की धमकियां और खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की भारी तैनाती शामिल थी।
ट्रंप ने दी थी चेतावनी
ट्रंप ने पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं हुआ तो 'समय खत्म हो रहा है' और अगला हमला पिछले साल जून में हुए हमलों से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा। उन्होंने ईरान से 2 मुख्य मांगें रखी थीं पहली परमाणु हथियार कार्यक्रम को बंद करना और उसकी निगरानी दूसरी विरोध प्रदर्शनों में लोगों की हत्या बंद हो। ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों मौतों की खबरें आई थीं, जिसके बाद ट्रंप ने सख्त रुख अपनाया था।
मध्य पूर्व पहुंचा अमेरिकी बेड़ा
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को मध्य पूर्व में तैनात किया है। ईरान की ओर से भी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा है कि अगर नेगोशिएशन फेयर और इक्विटेबल हों तो ईरान तैयार है। उन्होंने डिप्लोमेसी को ही रास्ता बताया, हालांकि ईरान ने अमेरिकी धमकियों के खिलाफ अपनी डिफेंसिव तैयारियां भी तेज की हैं।
क्यों बदले ट्रंप के तेवर?
वैसे देखा जाए तो ट्रंप के तेवर में बदलाव कई वजहों से हो सकता है। एक ओर क्षेत्रीय देश जैसे तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और गल्फ राष्ट्र डिप्लोमेटिक प्रयास कर रहे हैं ताकि संघर्ष को टाला जा सके। दूसरी ओर, ईरान में आर्थिक संकट और विरोध प्रदर्शनों के दबाव ने तेहरान को मजबूर किया हो कि वह कुछ समझौते की तरफ बढ़े। ट्रंप प्रशासन भी शायद पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है, क्योंकि इससे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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