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सीरिया पर फिर मेहरबान हुए ट्रंप, अमेरिका ने स्थाई रूप से हटा दिया सभी तरह के बैन

 Published : Dec 19, 2025 11:47 pm IST,  Updated : Dec 19, 2025 11:47 pm IST

सीरिया पर अमेरिका लगातार मेहरबानी दिखा रहा है। अब ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने सीरिया पर से सभी तरह के बैन को स्थाई रूप से हटा दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। Image Source : AP

दमिश्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि सीरिया पर भी मेहरबान हो गए हैं। लिहाजा अमेरिका ने सीरिया पर लगाए गए सभी तरह के बैन को स्थाई रूप से हटा दिया है। सीरिया की सरकार और उसके सहयोगियों ने शुक्रवार को हाल के दशकों में देश पर लगाए गए सबसे कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाए जाने का स्वागत किया है। 

ट्रंप के पहले कार्यकाल में लगा था बैन

सीरिया पर यह बैन ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिकी कांग्रेस ने 2019 में लगाया था। यह बैन तत्कालीन राष्ट्रपति बशर असद को 2011 से शुरू हुए लगभग 14 वर्ष लंबे गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए दंडित करने हेतु  सीरिया की सरकार और वित्तीय प्रणाली पर 'सीजर एक्ट' प्रतिबंध लगाए थे। दिसंबर 2024 में विद्रोही आक्रमण से असद के सत्ता से बेदखल होने के बाद प्रतिबंध हटाने की मांग होने लगी। हैरानी की बात ये थी कि इसमें ऐसे समर्थक भी शामिल थे, जो पहले सीरिया पर बैन लगवाने के लिए पैरवी कर रहे थे। मगर अब उनका तर्क था कि ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को पुनर्निर्माण परियोजनाएं शुरू करने से रोक रहे थे और सीरिया को अपनी क्षत-विक्षत अर्थव्यवस्था व बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण से वंचित कर रहे थे।

बृहस्पतिवार रात ट्रंप ने हटाये सारे बैन

पने पहले कार्यकारी आदेश से सीरिया पर से अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटा ने वाले ट्रंप ने अब गुरुवार देर रात कांग्रेस द्वारा देश के वार्षिक रक्षा खर्च बिल के हिस्से के रूप में पारित विधेयक पर हस्ताक्षर कर अंतिम निरसन को मंजूरी दी। इससे सीरिया पर लगाया गया बैन स्थाई रूप से खत्म कर दिया गया। हालांकि कुछ सांसदों ने निरसन को नए सुन्नी इस्लामवादी-प्रधान सीरियाई सरकार द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सहित कदमों पर सशर्त बनाने की कोशिश की थी। मगर अंत में प्रतिबंध बिना शर्त हटा दिए गए। हालांकि इस दौरान अल्पसंख्यक अधिकारों और आतंकवाद-निरोधी उपायों जैसे कई मुद्दों पर कांग्रेस को नियमित रिपोर्ट देने की आवश्यकता जताई गई।

सीरिया ने किया अमेरिका का शुक्रिया

सीरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में अमेरिका के इस कदम के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह “सीरियाई लोगों पर बोझ कम करने में योगदान देगा तथा पुनर्बहाली और स्थिरता के नए चरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। मंत्रालय ने सीरियाई व्यवसायियों और विदेशी निवेशकों से “निवेश अवसरों की खोज करने और पुनर्निर्माण में भाग लेने” का आह्वान किया, जिसकी लागत विश्व बैंक ने 216 अरब डॉलर आंकी है। केंद्रीय बैंक गवर्नर अब्दुलकादेर हुसरिएह ने बयान में कहा कि सीजर एक्ट के निरसन से देश का अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में पुनर्एकीकरण आसान होगा, जिसमें संप्रभु क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा, “सीरिया की शुरुआत कम रेटिंग से हो सकती है, जो संघर्ष से उबर रहे देशों के लिए सामान्य है। असली मूल्य उस बेंचमार्क और सुधार के लिए रोडमैप में है जो रेटिंग प्रदान करती है।”


सऊदी और तुर्की ने भी किया फैसले का स्वागत

नई सीरियाई सरकार के क्षेत्रीय सहयोगी तुर्की, सऊदी अरब और कतर ने भी अमेरिका के इस कदम का स्वागत किया है। तुर्की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकू केसेली ने बयान में कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि यह कदम सीरिया में स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि को मजबूत करने में योगदान देगा तथा देश के पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और बढ़ावा देगा। वहीं सऊदी विदेश मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने में “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका” की सराहना की। ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्होंने सऊदी के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगान के आग्रह पर प्रतिबंध हटाने का कदम उठाया।

ब्रिटेन ने भी हटाया बैन

अमेरिका के साथ ब्रिटेन ने भी शुक्रवार को ही सीरियाई सरकार और वित्तीय संस्थानों पर अपने व्यापक प्रतिबंध हटा लिए। हालांकि ब्रिटेन ने सीरिया के उन संगठनों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए जिन पर “नागरिकों के खिलाफ हिंसा में संलिप्तता” का आरोप है। इनमें असद सरकार से जुड़े चार व्यक्ति (सैन्य या वित्तीय भूमिका में) तथा नई सरकार की सेना से जुड़े दो व्यक्ति और तीन सशस्त्र समूह शामिल हैं, जिन पर इस साल सीरिया के तट पर संप्रदायिक हिंसा के दौरान नागरिकों पर हमलों का आरोप है। मार्च में असद समर्थकों के एक समूह द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले के बाद झड़पें भड़कीं थीं। ये बदले की हत्याओं में बदल गईं। इसमें सैकड़ों नागरिक मारे गए।

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