बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। सीट शेयरिंग को लेकर जहां हाय तौबा मची है, वहीं जिन उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट मिल गया है वो अपना नामांकन दाखिल कर रहे हैं। दो सीट ऐसे भी हैं जहां पत्नियों ने अपने सीट की कुर्बानी दी है, जिसके बाद उनका टिकट काटकर उनके पति खुद इस बार चुनाव मैदान में उतर गए हैं। पतियों के कारण अब दो महिला विधायकों के टिकट कट चुके हैं और इन महिलाओं की जगह उनके पति ही उम्मीदवार बनाए गए हैं। जिसमें से पहली सीट मोकामा की है, जहां से विधायक नीलम देवी के पति अनंत सिंह ने मंगलवार को जदयू के टिकट से अपना पर्चा दाखिल कर दिया है। दूसरी सीट है गौरा बौराम की जहां से विधायक स्वर्णा सिंह की जगह उनके पति सुजीत सिंह को बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
पति सुजीत सिंह के लिए स्वर्णा ने दी कुर्बानी
गौरा बौराम सीट से भाजपा ने सुजीत सिंह को टिकट दिया है जो चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर रहे हैं। बता दें कि एक दिन पहले ही सिंह भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें टिकट मिल गया। सुजीत सिंह के पिता सुनील कुमार दरभंगा से विधान पार्षद रहे हैं। स्वर्णा सिंह के बारे में बताएं तो पिछले चुनाव के दौरान 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी के टिकट पर गौरा बौराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और स्वर्णा सिंह ने करीब 7000 वोटों से जीत हासिल की थी। उन्हें कुल 59,538 वोट मिले थे। वहीं राजद के अफजल अली खान को 52,258 वोट मिले थे और इस सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार राजीव कुमार ठाकुर को 9123 मत ही मिल पाए थे।
मोकामा में नीलम देवी की जगह अनंत सिंह
मोकामा सीट से पत्नी नीलम देवी की जगह अनंत सिंह खुद चुनावी मैदान में उतरे हैं। पिछली बार 2020 के चुनाव में अनंत सिंह ने मोकामा से जीत हासिल की थी। लेकिन 2022 में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने जीत हासिल की थी और विधायक बनीं थीं। इसके बाद अनंत सिंह ने इस बार के चुनाव के लिए जेल से बाहर आते ही खुद चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी पत्नी पर ही आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी नीलम देवी ने क्षेत्र में अच्छा काम नहीं किया है। अनंत सिंह ने कहा कि नीलम देवी क्षेत्र में नहीं जाती हैं। लोग उनसे नाखुश हैं, इसलिए मैं खुद चुनाव लड़ूंगा।