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नवंबर-दिसंबर 2023 के दौरान दिल्ली-एनसीआर में पिछले 6 सालों में सबसे ज्यादा प्रदूषण, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Edited By: Sudhanshu Gaur @SudhanshuGaur24 Published : Jan 04, 2024 10:32 pm IST, Updated : Jan 04, 2024 10:32 pm IST

साल 2023 में अक्टूबर-नवंबर और दिसंबर के दौरान कई बार दिल्ली-एनसीआर का इलाका गैस चैंबर बन गया था। प्रदूषण की स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि सरकार ने स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी थीं।

दिल्ली प्रदूषण - India TV Hindi
Image Source : FILE दिल्ली प्रदूषण

नई दिल्ली: नवंबर और दिस्मबर महीने के दौरान देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास का एनसीआर इलाका प्रदूषण के लिए बदनाम है। अब इसी को लेकर एक रिपोर्ट आई हिया, जिसमें बताया गया है कि नवंबर-दिसंबर 2023 के दौरान पिछले 6 साल में सबसे ख़राब स्थिति रही है। एक रिसर्च के अनुसार,  दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पिछले छह वर्ष में नवंबर और दिसंबर 2023 में ‘बहुत खराब’ या बदतर वायु गुणवत्ता का सबसे लंबा दौर और ‘स्मॉग एपिसोड’ की स्थिति रही। 

बता दें कि स्मॉग एपिसोड की स्थिति वह होती है जब कम से कम तीन या अधिक दिन तक लगातार वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में होती है। दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण आंकड़े का विश्लेषण करने वाले एक स्वतंत्र थिंक-टैंक ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट’ (सीएसई) ने कहा कि 2015-17 के बाद से पीएम 2.5 के वार्षिक स्तरों में क्रमिक दीर्घकालिक सुधार 2023 में रुक गया। विश्लेषण के अनुसार ऐसा गर्मियों और मानसून के सामान्य से अधिक साफ मौसम के बावजूद हुआ और उत्तरी राज्यों में पराली से निकलने वाले धुएं में काफी कमी आई। 

2015-17 के बाद से इसके पीएम2.5 के वार्षिक स्तरों में गिरावट हो रही थी

सीएसई ने कहा कि इस साल दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाने वाले कारक पराली जलाने में कमी, नवंबर में अधिक बारिश और हल्की सर्दी की स्थिति के बावजूद, वार्षिक स्तर में सुधार होना चाहिए था। इसने कहा कि इसके बजाय, प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थितियों, विशेष रूप से कम हवा की गति के कारण प्रदूषण की स्थिति खराब हो गई। दिल्ली में 2015-17 के बाद से इसके पीएम2.5 के वार्षिक स्तरों में लगातार गिरावट हो रही थी। गिरावट का यह रुझान हालांकि 2023 में रुक गया था। 

गर्मियों में मौसम स्वच्छ होता जा रहा 

वर्ष 2023 (29 दिसंबर तक) के लिए दिल्ली का पीएम 2.5 वार्षिक औसत 100.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2022 के मुकाबले दो प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, औसत वार्षिक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)2.5 सांद्रता 2018 में 115.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 2019 में 109.2, 2020 में 95.1, 2021 में 106.2, 2022 में 98.6 और 2023 में 100.9 थी। विश्लेषण से पता चला कि जहां गर्मियों में मौसम स्वच्छ होता जा रहा हैं, वहीं सर्दियां अधिक प्रदूषित होती जा रही हैं। सीएसई ने कहा कि 2023 में, गर्मी के महीने (मार्च से जून) 2022 की तुलना में काफी कम प्रदूषित (14-36 प्रतिशत) थे। 

नवंबर और दिसंबर में सबसे ज्यादा प्रदूषण 

इसके विपरीत, 2023 में जनवरी, नवंबर और दिसंबर के सर्दियों के महीने 2022 में इन्हीं महीनों की तुलना में बहुत अधिक प्रदूषित (12-34 प्रतिशत) थे। सीएसई ने कहा, ‘‘दिल्ली में आमतौर पर नवंबर और दिसंबर में दो बार ‘स्मॉग एपिसोड’ हुआ। वर्ष 2023 में, 24 दिसंबर तक, तीन एपिसोड हुए, और 30 दिसंबर को, दिल्ली में ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता का लगातार तीसरा दिन देखा गया, दिल्ली में लगातार तीसरे दिन हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ रही, जो शहर में ‘स्मॉग’ की चौथी घटना है।

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