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दिल्ली पुलिस ने फर्जी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार; 100 से ज्यादा को बना चुके थे शिकार

 Published : Nov 02, 2025 02:43 pm IST,  Updated : Nov 02, 2025 02:45 pm IST

दिल्ली पुलिस ने फर्जी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने रेड के दौरान पांच लोगों को रंगे हाथ पकड़ा।

सांकेतिक फोटो- India TV Hindi
सांकेतिक फोटो Image Source : PTI

दिल्ली पुलिस ने फर्जी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कोटला मुबारकपुर इलाके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर 100 से अधिक लोगों से 15 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, गिरोह के सरगना तारिक खान और उसके साथी - कपिल, उसकी पत्नी तन्नू, अदीबा और शाहाना उर्फ ​​जोया द्वारा यह रैकेट चलाया जा रहा था और उन्होंने 100 से अधिक लोगों को ठगा। आरोपियों ने ‘स्किल इनोवेशन सॉल्यूशन’ नाम से एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी खोली थी और प्रसिद्ध भर्ती वेबसाइटों के जरिए नौकरी के इच्छुक लोगों को झांसे में लेते थे।

कैसे सामने आया मामला?

मामला तब सामने आया जब शालीमार गार्डन की रहने वाली मनीषा ने शिकायत दर्ज कराई कि अमरदीप नामक व्यक्ति ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी दिलाने के बहाने उससे 24,000 रुपये वसूल लिए। पुलिस ने बताया कि सितंबर में अमरदीप ने उससे संपर्क कर दावा किया कि उसकी प्रोफाइल को एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने शॉर्टलिस्ट कर लिया है और उसे साक्षात्कार के लिए कोटला मुबारकपुर कार्यालय बुलाया गया है। बाद में आरोपी ने उसे नौकरी दिलाने के बहाने एक ऑनलाइन पेमेंट ऐप के जरिए पैसे भेजने के लिए उकसाया। पुलिस ने बताया कि इसके बाद न तो कोई ऑफर दिया गया और न ही पैसे वापस किए गए। 

"सिक्योरिटी" या "प्रोसेसिंग" फीस के नाम पर वसूलते थे रुपये

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अंकित चौहान ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने इसी तरीके से 100 से अधिक लोगों को ठगा था। उन्होंने एजेंसी को वैध दिखाने के लिए करीब 10 टेली-कॉलर नियुक्त कर रखे थे। उन्होंने बताया कि कोटला मुबारकपुर स्थित कार्यालय में छापेमारी के दौरान पांचों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा गया। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे ऑनलाइन पोर्टल्स से नौकरी चाहने वालों से संपर्क कर उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाते और "सिक्योरिटी" या "प्रोसेसिंग" फीस के नाम पर यूपीआई या क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे वसूलते थे। 

पकड़े जाने से बचने के लिए बदल देते थे ऑफिस की जगह

पुलिस ने बताया कि एक बार भुगतान हो जाने के बाद वे पीड़ितों को जवाब देना बंद कर देते थे और पकड़े जाने से बचने के लिए कार्यालय का स्थान बदल देते थे। पुलिस ने मौके से कई मोबाइल फोन, फर्जी रसीदें, भुगतान रिकॉर्ड, नौकरी चाहने वालों के बायोडाटा और धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए यूपीआई विवरण बरामद किए हैं तथा ‘स्किल इनोवेशन सॉल्यूशन’ से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। डीसीपी चौहान ने कहा कि "अन्य पीड़ितों, वित्तीय लेनदेन और संभावित सहयोगियों की पहचान के लिए जांच जारी है। डिजिटल साक्ष्य का विश्लेषण किया जा रहा है।" (PTI Input)

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