Pollution Ka Solution (नई दिल्ली) : इंडिया टीवी के ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन कॉनक्लेव’ में पिछले 20 वर्षों से भारत में रह रहीं जापानी नागरिक युमी ओनिशी और चाइना रेडियो इंटरनेशनल एवं चाइना इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क के चीफ एडिटर पंकज श्रीवास्तव ने वैश्विक प्रदूषण संकट पर गहन चर्चा की। दोनों ने चीन और जापान के सफल मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि नीति, तकनीक, जीवनशैली में बदलाव और नागरिक अनुशासन से प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जापान और चीन ने नीति और तकनीक से प्रदूषण कैसे कम किया।
चीन ने ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में किया बड़ा बदलाव
पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि चीन ने ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव किए। प्रमुख कदमों में गैस आपूर्ति व्यवस्था में सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के साथ प्रमुख शहरों में एक परिवार-एक कार की सख्त नीतियां शामिल हैं। चीन ने इलेक्ट्रिक बाइक और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता काफी कम की है। सख्त नियामक उपायों और तकनीकी नवाचार से वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है।

जापान का जीवनशैली आधारित दृष्टिकोण
जापानी नागरिक युमी ओनिशी ने जापान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में जीवनशैली में बदलाव और नागरिक जिम्मेदारी मुख्य भूमिका निभाती है। जापान में कचरा अलग-अलग करना, कारों का कम से कम इस्तेमाल, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण नियमों का सम्मान रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। उन्होंने जोर दिया कि केवल सख्त कानून से नहीं, बल्कि लंबे समय तक व्यवहार परिवर्तन से ही स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण संभव है।
अनुशासन और जन भागीदारी जरूरी
दोनों वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि चीन और जापान में सफलता का राज जन-अनुशासन और नागरिक भागीदारी है। वहां लोग पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन करते हैं, जिससे नीतियां प्रभावी ढंग से लागू होती हैं। भारत में कई अच्छी प्रदूषण नियंत्रण नीतियां बनी हैं, लेकिन जन जागरूकता, अनुपालन और नागरिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के अभाव में परिणाम उतने प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं।
चीन-जापान में धूल नहीं, भारत में अभी भी झाड़ू से सफाई
पंकज श्रीवास्तव ने इस दौरान उदाहरण देकर कहा कि चीन में सड़कों पर पानी छिड़ककर धूल हटाई जाती है, जबकि भारत में अभी भी झाड़ू से सफाई होती है। जापान और चीन में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण होता है, लेकिन भारत में पेड़ लगाने की गति धीमी है। उन्होंने कहा कि विदेश घूमकर अच्छी चीजें देखने वाले अधिकारी भारत में उन्हें लागू नहीं कर पा रहे।
नागरिकों का सहयोग महत्वपूर्ण
दोनों विशेषज्ञों ने अंततः कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं। भारत में भी नागरिकों को सहयोग करना होगा। इनमें कचरा अलग करना, वाहनों का न्यूनतम इस्तेमाल, वृक्षारोपण में भागीदारी और पर्यावरण नियमों का पालन करके ही हम स्वच्छ हवा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। कॉनक्लेव ने यह संदेश दिया कि चीन और जापान के मॉडल से प्रेरणा लेकर भारत भी अनुशासन और जन भागीदारी से प्रदूषण पर विजय पा सकता है।