Thursday, January 15, 2026
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Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें व्रत कथा का पाठ, भगवान शिव दूर कर देंगे सभी दुख

Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi: शुक्रवार 16 जनवरी को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से और व्रत कथा का पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति आपको होती है।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Jan 15, 2026 12:22 pm IST, Updated : Jan 15, 2026 12:22 pm IST
Shukra Pradosh Vrath Katha - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK शुक्र प्रदोष व्रत कथा

Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से और व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। हर महीने में त्रयोदशी तिथि के दिन यह व्रत रखा जाता है। साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह तिथि 16 जनवरी को है। इस दिन शुक्रवार रहेगा इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। आपको बता दें कि शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और ऐश्वर्य की आपको प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत के दिन कथा का पाठ भी आपको अवश्य करना चाहिए। आइए ऐसे में जान लेते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की कथा। 

शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)

पुराणों में शुक्र प्रदोष व्रत की कथा वर्णित है। इस कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में तीन मित्र रहा करते थे। जिनमें एक मित्र ब्राह्मण, दूसरा धनिक और तीसरा राजा का पुत्र था। तीनों के बीच गहरी मित्रता थी और तीनों ही विवाहित थे। हालांकि, धनिक मित्र का अभी तक गौना नहीं हुआ था यानि धनिक की पत्नी अभी मायके में ही थी। 

एक रोज तीनों मित्र बैठकर बातें कर रहे थे और स्त्रियों की तारीफ कर रहे थे। बातचीत के दौरान ही ब्राह्मण मित्र ने कहा कि- 'नारीहीन घर में भूतों का डेरा हो जाता है।' धनिक के पुत्र ने जब यह बात सुनी तो उसने निश्चय कर लिए कि वो अपनी पत्नी को मायके से लाएगा। यह मन बनाकर वो अपने घर गया और अगले दिन अपनी पत्नी को लाने मायके जाने के लिए तैयार होने लगा। जब धनिक पुत्र के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने पुत्र को समझाया कि इस समय शुक्र अस्त हैं जो कि वैवाहिक जीवन की खुशियों का कारक भी हैं, इसलिए तुम्हें अभी अपनी पत्नी को वापस नहीं लाना चाहिए। हालांकि, धनिक पुत्र ने अपने माता-पिता की एक नहीं सुनी और वो अपनी भार्या को लाने निकल गया। 

जब धनिक पुत्र ससुराल पहुंचा तो वहां उसके सास-ससुर ने भी उसे समझाया कि शुक्र अस्त के दौरान उसे पत्नी को नहीं ले जाना चाहिए। लेकिन धनिक पुत्र अपनी जिद्द पर अड़ा रहा और अंत में सास-ससुर ने अपनी बेटी को दामाद के साथ विदा कर दिया। दोनों पति-पत्नी जब बेलगाड़ी पर बैठकर जा रहे थे तो रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और साथ ही बैल की टांग भी टूट गई। पति-पत्नी दोनों को चोट भी आयी। आगे चलकर उन्हें डाकुओं का सामना भी करना पड़ा जिन्होंने धनिक का पूरा धन भी लूट लिया। बड़ी मुश्किलों के साथ जब धनिक पुत्र और उसकी पत्नी घर पहुंचे तो धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता वैद्य के पास उसे ले गए तो वैद्य बोले की 3 दिन के बाद तुम्हारे पुत्र की मौत हो जाएगी। 

धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया है जब यह बात उसके दोस्त ब्राह्मण पुत्र को पता लगी तो वो धनिक पुत्र से मिलने जा पहुंचा। उसने धनिक पुत्र के पिता से कहा कि आप अपने पुत्र को उसकी पत्नी के साथ उसके ससुराल भेज दीजिए। यह परेशानियां इसीलिए आई हैं क्योंकि आपका पुत्र शुक्र अस्त के समय पत्नी को ससुराल ले आया है। अगर आपका पुत्र ससुराल पहुंच जाता है और आप शुक्र प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर देते हैं तो आपका पुत्र बच जाएगा। तत्पश्चात धनिक पुत्र के पिता ने ब्राह्मण पुत्र की बात मानी और अपने पुत्र और उसकी भार्या को ससुराल भेज दिया। इसके बाद शुक्र प्रदोष व्रत के चलते धनिक पुत्र की हालात ठीक हो गई और उसके जीवन के कष्ट भी दूर होने लगे। 

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