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'जनजातीय भाषाओं में भी मिलेगी बच्चों को उच्च शिक्षा, आदिवासी समुदाय को मिलेगा लाभ'

केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश में अब उच्च शिक्षा की पुस्तके 12 भारतीय भाषाओं के साथ-साथ जनजातीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

Edited By: Akash Mishra @Akash25100607
Published : Dec 26, 2022 05:28 pm IST, Updated : Dec 26, 2022 05:29 pm IST
सांकेतिक फोटो- India TV Hindi
Image Source : FILE सांकेतिक फोटो

केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश में अब उच्च शिक्षा की पुस्तके 12 भारतीय भाषाओं के साथ-साथ जनजातीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) इन पुस्तकों का अनुवाद जनजातीय भाषाओं में कराएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के मुताबिक NCERT पहले ही स्कूली शिक्षा और इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष की किताबें जनजातीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।

स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देती है NEP

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस पहल का लाभ आदिवासी समुदाय को मिलेगा। शिक्षा मंत्री के मुताबिक एनसीईआरटी, स्कूल में विभिन्न स्तर पर पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों को जनजातीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। इसके अलावादो जनजातीय विश्वविद्यालय भी शुरू किए जा चुके हैं।

यूजीसी ने इंटरनेशनल बुक पब्लिशर्स के साथ की चर्चा

वहीं यूजीसी ने इंटरनेशनल बुक पब्लिशर्स के साथ ग्रेजुएशन की पाठ्यपुस्तकों को भारतीय भाषाओं में लाने की संभावनाओं पर चर्चा की। यूजीसी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने इस राष्ट्रीय मिशन में भागीदार बनने की इच्छा जताई है। यूजीसी के अध्यक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक प्रकाशकों के साथ बातचीत में पूछा कि क्या वे भारतीय भाषाओं में स्नातक अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकें ला सकते हैं। विली इंडिया, स्प्रिंगर नेचर, टेलर एंड फ्रांसिस, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया, सेंगेज इंडिया और मैकग्रा-हिल इंडिया के प्रतिनिधियों ने बातचीत में भाग लिया।

इन भाषाओं में किताबों के अनुवाद पर दिया गया जोर  

UGC के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने आईएएनएस को बताया, प्रकाशकों से चर्चा के दौरान देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों में अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों के लिए तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, उड़िया, बंगाली, असमिया, पंजाबी, हिंदी और उर्दू जैसी भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों के अनुवाद पर जोर दिया गया।

'एक शीर्ष समिति का गठन किया'

UGC के अध्यक्ष ने आगे बताया कि यूजीसी प्रकाशकों को पाठ्यपुस्तकों, अनुवाद उपकरणों और संपादन के लिए विशेषज्ञों की पहचान के संबंध में सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यूजीसी ने एक रोड मैप तैयार करने और बीए, बीकॉम, और बीएससी जैसे ग्रेजुएशन कार्यक्रमों में उपयोग की जाने वाली भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को लाने की दिशा में काम करने के लिए एक शीर्ष समिति का गठन किया है। 

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