सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी स्टारर 'बॉर्डर 2' ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है, बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से भी गहराई से जोड़ दिया है। फिल्म ने 1997 में रिलीज हुई जेपी दत्ता की आइकॉनिक वॉर ड्रामा 'बॉर्डर' की यादों को ताजा करते हुए उसकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक सशक्त कोशिश की है। मेकर्स ने मूल फिल्म को श्रद्धांजलि देते हुए उसके कुछ सबसे यादगार संगीत और भावनात्मक पलों को नए रूप में पेश किया है, जिससे पुराने दर्शकों के साथ-साथ युवा ऑडियंस भी कहानी से जुड़ पाई।
आइकॉनिक गानों की भावनात्मक वापसी
फिल्म के सबसे प्रभावशाली पहलुओं में से एक इसके गाने हैं। 'बॉर्डर 2' में ‘संदेशे आते हैं’ और ‘जाते हुए लम्हों’ जैसे आइकॉनिक ट्रैक्स को नए अंदाज में रीक्रिएट किया गया है। जहां ‘संदेशे आते हैं’ को अब ‘घर कब आओगे’ नाम दिया गया है, वहीं ‘जाते हुए लम्हों’ को नई आवाजों और नए संदर्भ के साथ कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। ये गाने सिर्फ म्यूजिक एलिमेंट नहीं हैं, बल्कि फिल्म की भावनात्मक रीढ़ हैं, जो सैनिकों और उनके परिवारों के रिश्तों को गहराई से दिखाते हैं।
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‘जाते हुए लम्हों’ का नया रूप
‘जाते हुए लम्हों’ का रीक्रिएशन खास तौर पर दर्शकों को छू रहा है। मूल फिल्म में यह गाना सुनील शेट्टी और शरबानी मुखर्जी पर फिल्माया गया था, जो आज भी यादगार माना जाता है। 'बॉर्डर 2' में यह गीत वरुण धवन और मेधा राणा, दिलजीत दोसांझ और सोनम बाजवा, तथा अहान शेट्टी और अन्या सिंह पर फिल्माया गया है। विशाल मिश्रा और अनु मलिक की संगीत रचना में रूपकुमार राठौड़ के साथ विशाल मिश्रा की आवाज जुड़ती है, जिससे गीत में पुरानी संवेदना के साथ नया एहसास भी जुड़ जाता है। यह ट्रैक ऑफिसर्स और उनके परिवारों के बीच भावुक विदाई के सीन को और भी असरदार बना देता है।
फिर चर्चा में आईं शरबानी मुखर्जी
इस मौके पर एक बार फिर शरबानी मुखर्जी चर्चा में हैं, जो मूल 'बॉर्डर' का अहम हिस्सा थीं। जहां सुनील शेट्टी आज भी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं, वहीं शरबानी ने वर्षों पहले शोबिज से दूरी बना ली थी। रोनो मुखर्जी की बेटी और काजोल, रानी मुखर्जी व अयान मुखर्जी की कजिन शरबानी ने अपने करियर की शुरुआत 'बॉर्डर' से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘घर आजा सोनिया’ जैसे म्यूजिक वीडियो में काम किया और फिर दक्षिण भारतीय सिनेमा, खासकर मलयालम फिल्मों की ओर रुख किया।
साउथ सिनेमा तक का सफर
शरबानी ने प्रियदर्शन की राकिलीपट्टू में ज्योतिका, तब्बू और इशिता अरुण के साथ स्क्रीन साझा की, वहीं सूफी परंजा कथा में लीड रोल निभाकर क्रिटिक्स की सराहना भी हासिल की। हालांकि उनका एक्टिंग करियर लंबा नहीं रहा। 2015 की मलयालम फिल्म नमुक्कोरे आकाशम के बाद उन्होंने अभिनय से ब्रेक ले लिया और एक निजी जीवन को प्राथमिकता दी।
पर्सनल लाइफ और पारिवारिक जुड़ाव
पर्सनल लाइफ की बात करें तो शरबानी की शादी 2003 से बिजनेसमैन संजय कपूर से बताई जाती है। एक्टिंग छोड़ने के बावजूद वह मुखर्जी परिवार से जुड़े सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय रहती हैं। हर साल मुंबई में होने वाली मुखर्जी परिवार की दुर्गा पूजा में उनकी मौजूदगी देखी जाती है, जहां काजोल, रानी और अयान मुखर्जी भी परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं।
विरासत को आगे बढ़ाती 'बॉर्डर 2'
साल 2025 की दुर्गा पूजा शरबानी के लिए भावनात्मक रही, क्योंकि कुछ महीने पहले ही उनके पिता रोनो मुखर्जी का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। हालांकि शरबानी अब मीडिया की चकाचौंध से दूर हैं, लेकिन उन्होंने 2024 में इंडी फिल्म शैडोज ऑफ मुंबई में एक कैमियो कर सबको चौंका दिया था। लगभग 13 फिल्मों में काम करने के बावजूद, बॉर्डर आज भी उनके करियर की सबसे आइकॉनिक फिल्म मानी जाती है। बॉर्डर 2 के जरिए उस विरासत को नई ऊर्जा और नए चेहरे मिले हैं, जिसने साबित कर दिया कि कुछ कहानियां और कुछ गीत वक्त के साथ और भी ज्यादा असरदार हो जाते हैं।
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