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'जय भीम' के डायरेक्टर ने जताया खेद, कहा- 'किसी को आहत करने का कोई इरादा नहीं था'

तमिल और तेलुगु सहित अन्य भाषाओं में 1 नवंबर को रिलीज़ हुई 'जय भीम' पर तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है।

Written by: PTI
Published : Nov 22, 2021 07:53 am IST, Updated : Nov 22, 2021 07:53 am IST
jai bheem director expressed regret says no intention to hurt anyone news in hindi - India TV Hindi
Image Source : TWITTER: @PRIMEVIDEOIN 'जय भीम' के डायरेक्टर ने जताया खेद, कहा- 'किसी को आहत करने का कोई इरादा नहीं था'

Highlights

  • वन्नियार संगम और समुदाय के सदस्यों ने किया फिल्म का विरोध
  • 'जय भीम' फिल्म 1 नवंबर को रिलीज हो चुकी है

अभिनेता सूर्या अभिनीत फिल्म 'जय भीम' के निर्देशक था से ज्ञानवेल ने कहा कि उनका किसी विशेष समुदाय को आहत करने का कोई इरादा नहीं था और जिन्हें भी उससे ठेस पहुंची उसके लिये वह खेद प्रकट करते हैं। तमिल और तेलुगु सहित अन्य भाषाओं में 1 नवंबर को रिलीज़ हुई 'जय भीम' पर तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है, जहां वन्नियार संगम और समुदाय के सदस्यों ने आरोप लगाया कि फिल्म में उन्हें खराब तरीके चित्रित किया गया है।

फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन-प्राइम वीडियो पर रिलीज किया गया था। ज्ञानवेल ने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म के निर्माण में "किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करने का थोड़ा सा भी विचार" नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘जिन्हें भी इससे ठेस पहुंची उनके प्रति मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं।" 

फिल्म 'जय भीम' को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच लीड एक्टर सूर्या को दी गई पुलिस सिक्योरिटी

फिल्म निर्देशक ने विवाद के मद्देनजर सूर्या को हुई कठिनाई के लिए भी खेद व्यक्त किया, जो फिल्म के मुख्य अभिनेता और जय भीम के निर्माता हैं। 

इस विवाद की जड़ एक दुष्ट पुलिस उप-निरीक्षक को 'गुरु' (गुरुमूर्ति) के रूप में नामित करके और एक दृश्य में पृष्ठभूमि में, एक कैलेंडर में समुदाय के उग्र अग्नि पॉट प्रतीक को और अग्रभाग में निर्दोष आदिवासी व्यक्ति को मौत के घाट उतारने वाले पुलिस एसआई को दिखाया जाना है, जिसे वन्नियार समुदाय की कथित बदनामी बताया जा रहा है। 

ज्ञानवेल ने एक बयान में दावा किया, "मुझे नहीं पता था कि पृष्ठभूमि में लटकाए गए कैलेंडर को एक समुदाय के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा। इसे किसी विशेष समुदाय के संदर्भ का प्रतीक बनाने का हमारा इरादा नहीं था और इसका मकसद वर्ष 1995 की अवधि को प्रतिबिंबित करना था।”  

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