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Explainer: दिल्ली में ईदगाह पर किसने फैलाई अफवाह? झांसी की रानी की प्रतिमा पर ऐतराज क्यों है? पढ़ें पूरा मामला

 Reported By: Shoaib Raza Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 27, 2024 08:20 am IST,  Updated : Sep 27, 2024 08:21 am IST

दिल्ली में शाही ईदगाह के सामने रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापित करने के विवाद के बीच कुछ शरारती तत्वों ने एक ऐसा मैसेज वायरल कर दिया जिसके बाद मौके पर काफी भीड़ जुट गई।

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शादी ईदगाह। Image Source : PTI FILE

नई दिल्ली: दिल्ली में शाही ईदगाह की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर फैलाई जा रही अफवाह के बाद गुरुवार को बने हालात को पुलिस ने वक्त रहते संभाल लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप्स में मैसेज करके लोगों को ईदगाह में जमा होने के लिए उकसाया था। बता दें कि शुक्रवार को यानी कि आज जुमे की नमाज भी है और इसे लेकर ईदगाह के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों की भी तैनाती की जा रही है।

किसने वायरल किया भड़काऊ मैसेज?

गुरुवार को ईदगाह मस्जिद में उस वक्त लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई जब ये मैसेज वायरल किया गया कि ईदगाह की जमीन पर रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाई जा रही है। पुलिस ने फौरन मैसेज जारी करके चेतावनी दी कि सदर बाजार इलाके में किसी को भी प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ लोगों ने मस्जिद के अंदर नारेबाजी की और फरार हो गए। जो मैसेज वायरल हुआ था, उसमें लिखा था, ‘मुसलमानों अब भी नहीं उठे तो कब उठोगे? अब भी नहीं लड़े तो कब लड़ोगे? अभी भी नहीं बोले तो तुम्हें इजाज़त लेनी पड़ेगी नमाज़ के लिए? शर्म करो क्या मुंह दिखाओगे खुदा को?’

दिल्ली पुलिस ने फौरन एक्शन लिया

भड़काऊ मैसेज दिल्ली के फिल्मिस्तान इलाके में सदर बाजार के पास ईदगाह के सामने एक पार्क को लेकर फैलाया गया था। मैसेज में दावा किया गया कि ईदगाह के सामने वाले पार्क की जमीन पर कब्जा करके मुसलमानों का हक मारा जा रहा है। इस मैसेज के वायरल होने के बाद ईदगाह के अंदर कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते भीड़ जमा होने लगी जिसके बाद पुलिस ने फौरन एक्शन लिया और अपनी तरफ से मैसेज सर्कुलेट किया कि किसी भी तरह के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई है और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। गुरुवार की शाम को भारी मात्रा में पुलिस बल भी तैनात हो गया और हालात को काबू से बाहर नहीं होने दिया गया।

बाहरी लोगों ने वायरल किए मैसेज?

पुलिस इस संवेदनशील मामले में पूरी सतर्कता बरत रही है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बाहर से आए तत्वों का काम है। पुलिस वायरल मैसेज भेजने वालों की तलाश में जुट गई है और आज जुमे की नमाज के लिए भी पूरी तैयारी कर रही है। बता दें कि स्थानीय लोगों रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाने को लेकर कोर्ट का आदेश मानने की बात कह रहे हैं लेकिन सोशल मीडिया पर फैल रहे भड़काऊ मैसेज पुलिस के लिए जरूर चुनौती बने हुए हैं। फिलहाल पुलिस ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की है और बड़ी मात्रा में पुलिसकर्मियों एवं केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है।

लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर ऐतराज क्यों है?

दरअसल, दिल्ली के सदर बाजार में स्थित शाही ईदगाह के पास पार्क में रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा लगाने के लिए खुदाई की जा रही थी। ये पार्क ईदगाह मैदान के ठीक सामने पड़ता है और ईदगाह की प्रबंधक कमेटी इस पार्क पर अपना दावा ठोक रही थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट से उसे कड़ी फटकार सुनने को मिली। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई एक राष्ट्रीय नायक हैं और उनका स्थान सभी धार्मिक सीमाओं से ऊपर है। कोर्ट ने कहा, ‘ईदगाह कमेटी की याचिका सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने वाली है। ईदगाह की संपत्ति में पार्क शामिल नहीं है, क्योंकि यह डीडीए के अंतर्गत आता है।’

कोर्ट ने इस मामले में और क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ईदगाह कमेटी का यह दावा करना कानून के मुताबिक नहीं है। कोर्ट ने कहा, ‘ एक तरफ हम महिला सशक्तीकरण की बात कर रहे हैं। वह सभी धार्मिक सीमाओं से परे एक राष्ट्रीय गौरव हैं और आप यह धार्मिक आधार पर कर रहे हैं। इतिहास को सांप्रदायिक राजनीति के आधार पर न बांटें। ऐसा प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य अदालत के माध्यम से सांप्रदायिक राजनीति करना है। रानी लक्ष्मीबाई का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। अगर जमीन आपकी थी, तो आपको स्वेच्छा से आगे आना चाहिए था।’

25 सितंबर को शुरू हुआ खुदाई का काम

एकल पीठ ने समिति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता शाही ईदगाह (वक्फ) प्रबंध समिति को दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी कि DDA द्वारा शाही ईदगाह के आसपास के पार्क या खुले मैदान के रखरखाव का विरोध करने और इस प्रकार DDA द्वारा उसके आदेश पर प्रतिमा की स्थापना का विरोध करने का कोई कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद 25 सितंबर को पार्क में खुदाई का काम शुरू हो चुका है। मूर्ति लगाए जाने पर स्थानीय लोग कोर्ट का आदेश मानने की बात कह रहे हैं लेकिन पुलिस के लिए चैलेंज वो शरारती तत्व हैं जो वायरल मैसेज करके लोगों को भड़का रहे हैं।

मामले पर सियासत भी हुई शुरू

वहीं, इस मामले पर सियासत भी शुरू हो गई है। BJP ने AAP पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह परियोजना PWD और MCD द्वारा प्रस्तावित की गई थी जो AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के अधीन आते हैं। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आरोप लगाया कि BJP शहर के झंडेवालान इलाके में RSS कार्यालय के बाहर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा को हटाने की साजिश कर रही है। 

दिल्ली BJP चीफ ने दिया ये बयान

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि संजय सिंह ने BJP पर देशबंधु गुप्ता रोड चौराहे से रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा हटाने का आरोप लगाया, लेकिन यह परियोजना लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा प्रस्तावित थी और ये दोनों दिल्ली की आप सरकार के अधीन आते हैं। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 2016-17 में तीस हजारी से फिल्मिस्तान तक फ्लाईओवर को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था और इसके तहत रानी झांसी रोड को चौड़ा किया जाना था, जिसके लिए देशबंधु गुप्ता चौक पर रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा को ट्रांसफर करने को मंजूरी दी गई थी।

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