Friday, January 16, 2026
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शरीर के किस अंग को कितना नुकसान पहुंचा रहा है वायु प्रदूषण, 10 नहीं इतने साल कम हो चुकी दिल्ली एनसीआर वालों की उम्र

Which Body Part Pollution Affecting Most: वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं सिर से लेकर पांव तक हर अंग को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण में सांस लेने से दिल्ली एनसीआर में रहने वालों की औसत उम्र इतने साल कम हो चुकी है।

Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
Published : Jan 16, 2026 11:56 am IST, Updated : Jan 16, 2026 11:56 am IST
किस अंग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है प्रदूषण- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV किस अंग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है प्रदूषण

दिल्ली एनसीआर में रहने वाले जिस हवा में सांस ले रहे हैं वो सिर्फ फेफड़ों के लिए ही खतरनाक साबित नहीं हो रही है। सिर से लेकर पैर के उंगूठे तक हर अंग को बुरी तरह डैमेज कर रही है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात तो ये है कि इस डैमेज को रिवर्स नहीं किया जा सकता। यानि आपके फेफड़ों को जितना नुकसान हो चुका है उसे ठीक नहीं किया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि अगर हम आज अच्छी हवा में सांस ले रहे हैं या 15-20 दिन के लिए कहीं चले गए तो फेफड़े ठीक हो जाएंगे। हम रोजाना जिस हवा में सांस ले रहे हैं उससे हर रोज नुकसान वो इतनी खराब है कि आपको सांस तो लेनी पड़ेगी और ये हमेशा के लिए होने वाला डैमेज है। ये नुकसान हर रोज बढ़ता ही जा रहा है।

PM 2.5 और PM 10 कितना खतरनाक है?

डॉक्टर विवेक नांगिया (वाइस चेयरमैन एंड हेड पल्मोनोलॉजी, मैक्स हेल्थ केयर) ने बताया,'पीएम 10 यानि थोड़े मोटे पार्टिकल्स इन्हें नाक, आंख और बाहरी लेवल पर ही फिल्टर आउट किया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा इनसे त्वचा में एलर्जी हो सकती है, तुरंत आंखों में जलन हो सकती है या गले और नाक में समस्या हो सकती है। लेकिन पीएम 2.5 या उससे छोटे पार्टिकल्स, जिन्हें अल्ट्राफाइन पार्टिकल भी कहते हैं। ये सीधे आपके फेफड़ों के अंदर जाते हैं। हवा में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैस फेफड़ों के अंदर जाती हैं। फेफडों से ये खून में पहुंचकर शरीर के हर हिस्से में पहुंचती है और सूजन पैदा करती हैं। सिर से लेकर पैर तक शरीर का हर अंग वायु प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है। अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, एलर्जी ये सभी फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं।' 

प्रदूषण से किस अंग को नुकसान हो रहा है?

डॉक्टर विवेक नांगिया ने बताया कि, 'वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। जो नॉन स्मोकर्स हैं उनमें तेजी से कैंसर बढ़ रहा है। वायु प्रदूषण में सूजन बढ़ाने वाली गैस जब खून के जरिए हार्ट में पहुंचती हैं तो वहां सूजन पैदा कर सकती हैं। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। अरिदमिया का खतरा पैदा कर सकता है। प्रदूषण उम्र से पहले मौत का कारण बन सकता है। दिमाग में जाकर स्ट्रोक का खतरा पैदा कर सकता है। हाल ही में आई स्टडीज में पता चला है कि वायु प्रदूषण में रहने वालों में डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ रहा है। पैनक्रियाज में जाकर शुगर को प्रभावित कर सकता है। जोड़ों में ये प्रदूषित खून सूजन पैदा करता है। रूमेटोइड आर्थराइटिस का खतरा बढ़ाता है। प्रेगनेंट महिला के शिशु पर असर हो सकता है। समय से पहले डिलिवरी और जन्मजात विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण हवा में सासं लेने वाले शिशु को फेफड़ों और सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार सर्दी जुकाम बना रह सकता है और बच्चों में भी मेंटल रिटार्डेशन का खतरा पैदा होता है। प्रदूषण में सासं लेने पर बच्चों में टीबी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।'

प्रदूषण से 12 साल कम हो चुकी है औसत आयु

WHO ने भी पर्यावरण से होने वाले सबसे बड़े खतरे में वायु प्रदूषण को सबसे बड़ा माना है। 2024 में आई एक रिपोर्ट की मानें तो युवाओं में मौत के सबसे बड़े कारण में हाई ब्लड प्रेशर सबसे ऊपर है और दूसरे नंबर पर वायु प्रदूषण है। बच्चों में मौत का सबसे बड़ा कारण कुपोषण और दूसरे नंबर पर वायु प्रदूषण है। भारत में प्रदूषण के कारण औसत आयु 5-6 साल कम हो चुकी है। वहीं दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों की औसत उम्र बढ़ते प्रदूषण की वजह से 12 साल के करीब कम हो चुकी है।

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