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थायराइड से महिलाएं क्यों होती हैं ज्यादा प्रभावित? एक्सपर्ट से जानें क्या हैं लक्षण और कैसे करें बचाव ?

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : May 25, 2025 10:41 am IST,  Updated : May 25, 2025 10:42 am IST

World Thyroid Day: एनएफएचएस-5 के अनुसार भारत में 2.9 प्रतिशत लोग थायरॉयड डिसऑर्डर की चपेट में हैं। ऐसे में लोगों को थायरॉइड से जुड़ी जागरूकता देने के लिए हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है।

विश्व थायरॉइड दिवस - India TV Hindi
विश्व थायरॉइड दिवस Image Source : SOCIAL

थायरॉयड डिसऑर्डर की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। एनएफएचएस-5 के अनुसार भारत में 2.9 प्रतिशत लोग थायरॉयड डिसऑर्डर की चपेट में हैं। ऐसे में लोगों को थायरॉइड से जुड़ी जागरूकता देने के लिए हर साल 25 मई को World Thyroid Day यानी विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है। इस समस्या से सबसे ज़्यादा महिलाएं प्रभावित होती हैं। बता दें, यह समस्या थायरॉयड ग्रंथि से हार्मोन स्राव में अनियमितता के कारण होती है। आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में प्रमुख - एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. धीरज कपूर बता रहे हैं कि आखिर महिलाएँ थायरॉयड की चपेट में तेजी से क्यों आते हैं और बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

इसलिए महिलाओं में अधिक है समस्या

महिलाओं में पाए जाने वाले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन थायरॉयड की फंक्शनिंग में अहम भूमिका निभाते हैं। मासिक धर्म की शुरुआत, गर्भावस्था और मीनोपॉज जैसे जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं के शरीर में इन हार्मोन का स्तर बदलता है। यही बदलाव कई बार थायरॉयड की फंक्शनिंग को प्रभावित करता है और थायरॉयड डिसऑर्डर का खतरा बढ़ाता है। कई महिलाओं में प्रजनन के बाद थायरॉयड डिसऑर्डर की समस्या देखी जाती है। इसे पोस्टपार्टम थायरॉयडिटिस कहा जाता है। मासिक धर्म के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव से भी खतरा बढ़ जाता है।

इन लक्षणों पर रखें नजर

थायरॉयड डिसऑर्डर दो प्रकार का होता है: हाइपो थायरॉयडिज्म और हाइपर थायरॉयडिज्म। हाइपो थायरॉयडिज्म में थायरॉयड ग्रंथि की सक्रियता कम हो जाती है और हार्मोन कम बनता है। वहीं, हाइपर थायरॉयडिज्म में ग्रंथि की अतिसक्रियता से ज्यादा हार्मोन स्रावित होता है।  इन दोनों के लक्षणों में कुछ अंतर रहता है।

हाइपो थायरॉयडिज्म के लक्षण: 

  • थकान एवं कमजोरी

  • अचानक वजन बढ़ना

  • ठंड ज्यादा लगना

  • त्वचा एवं बालों में रूखापन

  • मासिक धर्म में अनियमितता

  • डिप्रेशन एवं चिड़चिड़ापन

  • जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द

  • दिल की धड़कन धीमी होना

हाइपर थायरॉयडिज्म के लक्षण

  • वजन कम होना

  • बहुत गर्मी लगना और पसीना आना

  • बेचैनी होना

  • दिल की धड़कन तेज होना

  • त्वचा गर्म लगना

  • मासिक धर्म की अनियमितता

  • बाल पतले व रूखे होना और ज्यादा झड़ना

  • अचानक कंपकंपी होना

  • उपरोक्त लक्षणों के अलावा, गले के आसपास सूजन होना, आवाज में बदलाव, पाचन में समस्या और हाथों या पैरों में सूजन होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

इलाज के हैं कई तरीके

थायरॉयड डिसऑर्डर के इलाज के कई तरीके हैं। सबसे सामान्य तरीका है दवा का। कुछ दवाओं के माध्यम से कृत्रिम थायरॉयड हार्मोन को शरीर में पहुंचाकर हाइपो थायरॉयडिज्म का इलाज किया जाता है। इसी तरह हाइपर थायरॉयडिज्म के मामले में कुछ दवाओं के जरिये थायरॉयड हार्मोन का स्राव ब्लॉक किया जाता है। कुछ मामलों में रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी के माध्यम से थायरॉयड सेल्स को निशाना बनाकर हार्मोन का स्राव रोका जाता है। हाइपर थायरॉयडिज्म, थायरॉयड कैंसर और कुछ अन्य गंभीर मामलों में सर्जरी करके थायरॉयड ग्रंथि हटा दी जाती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

 
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