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"तमिलनाडु में हिंदी के लिए न जगह थी, न है और न होगी", CM स्टालिन का बड़ा बयान

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jan 25, 2026 02:57 pm IST,  Updated : Jan 25, 2026 03:05 pm IST

भाषा शहीद दिवस के मौके पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि यहां हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन- India TV Hindi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन Image Source : FILE (PTI)

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने रविवार को 'भाषा शहीद दिवस' के अवसर पर केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए दोहराया कि राज्य में हिंदी थोपे जाने के लिए कोई जगह नहीं है। स्टालिन ने 1960 के दशक के हिंदी-विरोधी आंदोलन के बलिदानियों को याद करते हुए कहा कि तमिलनाडु अपनी भाषाई पहचान की रक्षा के लिए हमेशा अडिग रहेगा।

"न तब जगह थी, न अब है, न कभी होगी"

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "भाषा शहीद दिवस के अवसर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए न तब कोई जगह थी, न अब है और न कभी होगी।" उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें 1965 के ऐतिहासिक हिंदी-विरोधी आंदोलन के संघर्ष को दिखाया गया है। इस वीडियो में द्रमुक के दिग्गज नेताओं सी. एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि के योगदान को भी रेखांकित किया गया।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने चेन्नई में "भाषा शहीद" थलामुथु और नटरासन के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण (CMDA) भवन पर इन दोनों शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण किया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी-विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में विभिन्न भाषाई और राष्ट्रीय समूहों के अधिकारों और उनकी पहचान की रक्षा की है।

क्या है 'भाषा शहीद दिवस' का इतिहास?

'भाषा शहीद' शब्द उन आंदोलनकारियों के लिए उपयोग किया जाता है जिन्होंने 1964-65 के दौरान तमिलनाडु में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने के विरोध में अपनी जान गंवाई थी। उस समय कई युवाओं ने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ आत्मदाह किया था। तभी से तमिलनाडु 'दो भाषा सूत्र' का पालन कर रहा है, जिसमें केवल तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है।

NEP 2020 और हिंदी थोपने का विरोध

द्रमुक सरकार लगातार केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध कर रही है। स्टालिन और उनकी पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नीति के माध्यम से पिछले दरवाजे से हिंदी को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपने की कोशिश कर रही है। सीएम ने स्पष्ट किया, "हम अपनी भाषा से अपने जीवन की तरह प्रेम करते हैं और जब-जब इसे दबाने की कोशिश होगी, विरोध उतना ही तीव्र होगा।"

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