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ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने जमकर किया AI का इस्तेमाल, पाकिस्तान को चटाई धूल, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव साहनी ने बताया

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Subhash Kumar
 Published : Oct 06, 2025 10:52 pm IST,  Updated : Oct 06, 2025 10:53 pm IST

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का निर्णायक इस्तेमाल किया जिसने आधुनिक युद्ध में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित किया है। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव साहनी ने इस बारे में जानकारी दी है।

AI USED Operation Sindoor- India TV Hindi
भारतीय सेना ने किया AI का इस्तेमाल। Image Source : REPORTER

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का खूब इस्तेमाल किया। यह भारतीय सेना की नई तकनीक है जिसकी वजह से पाकिस्तान की हर तस्वीर महज 2-3 सेकंड के अंदर हमारे पास मौजूद थी। एआई-संचालित सिस्टम ने क्षेत्र में सैनिकों को सीधे वास्तविक समय की तस्वीरें, सटीक विश्लेषण और पूर्वानुमानित खुफिया जानकारी प्रदान की थी। इससे हम सटीकता और गति के साथ पाकिस्तान की आतंकवादी संरचनाओं और सैन्य ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हुए। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव साहनी ने इंडिया TV को आज इन सब की जानकारी दी। 

1. आधुनिक सेनाओं का बदलता रूप

दुनिया भर की सेनाएँ आज तेज़ी से बदल रही हैं। वे ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और नई तकनीकों जैसे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स (BDA) को अपना रही हैं। इन तकनीकों से युद्धक क्षमता बढ़ती है, स्थिति की बेहतर समझ बनती है और सेनाएँ तकनीकी रूप से आगे रहती हैं; चाहे वह युद्ध, खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्स या ट्रेनिंग का क्षेत्र हो।

2. भारतीय सेना का परिवर्तन का दशक

भारतीय सेना ने समझा है कि बड़ा बदलाव समय लेता है। इसलिए उसने “Decade of Transformation” यानी परिवर्तन का दशक शुरू किया है। साल 2024–2025 को “Year of Technology Absorption” यानी तकनीक अपनाने का वर्ष घोषित किया गया है, ताकि तकनीक सिर्फ मुख्यालयों तक ही नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर के जवानों तक पहुँचे।

3. सुधारों का वर्ष और परिवर्तन का तालमेल

रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित Year of Reforms (सुधारों का वर्ष) इस बदलाव का बड़ा प्रेरक रहा है। इन दोनों पहलों ने मिलकर सेना को आधुनिक, फुर्तीली और भविष्य के लिए तैयार बनने में मदद दी है।

4. ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण

ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण सिर्फ नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं हैं। यह इस बात को बदलने के बारे में है कि हमारी प्रणालियाँ, प्रक्रियाएँ और कार्य एक साथ कैसे तेज़ और भरोसेमंद नतीजे देते हैं।

5. डीजीआईएस के नेतृत्व में उपलब्धियां

Directorate General of Information Systems (DGIS) के नेतृत्व में, सेना में ऑटोमेशन के चलते यूज़र्स की संख्या में 1200% वृद्धि हुई है और डेटा स्टोरेज क्षमता में 620% की बढ़ोतरी हुई है। इससे सेना की डिजिटल व्यवस्था और मज़बूत हुई है, जिससे हर स्तर पर बेहतर निर्णय लिए जा रहे हैं।

6. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस: एक फोर्स मल्टीप्लायर

AI युद्ध के तरीक़े बदल रहा है; यह अधिक तेज़, सटीक और लचीला बना रहा है। भारतीय सेना ने पहले ही AI को अपने कामकाज में शामिल कर लिया है, और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी प्रभावशीलता साफ़ दिखी।

7. प्रमुख AI आधारित प्रणालियां

• ECAS (Electronic Intelligence Collation & Analysis System): देश में विकसित सॉफ़्टवेयर जो रियल टाइम में ख़तरों की पहचान और प्राथमिकता तय करता है।
• TRINETRA सिस्टम (Project SANJAY के साथ जुड़ा): बेहतर समन्वय और निर्णय लेने के लिए एक साझा ऑपरेशनल तस्वीर प्रदान करता है।
• Predictive Modelling और Weather Forecasting: लंबी दूरी के हथियारों के लिए मौसम और ख़तरों की भविष्यवाणी कर सटीक योजना बनाने में मदद करता है।
 
8. इन नवाचारों से सेना की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ा सुधार आया।
 
9. जिम्मेदार और चरणबद्ध तरीके से AI का उपयोग- सेना में AI का इस्तेमाल सोच-समझकर और चरणबद्ध ढंग से किया जा रहा है। ध्यान इन बातों पर है :- 
 
• ऐसे क्षेत्रों में AI का प्रयोग जहाँ यह सैनिकों का जोखिम कम करे और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाए।
• सभी स्वचालित प्रणालियों पर मानवीय नियंत्रण बनाए रखना।
• पारदर्शिता और भरोसे के लिए मज़बूत टेस्टिंग और एथिकल गवर्नेंस ढाँचा तैयार करना।

10. AI के छह प्रमुख फोकस क्षेत्र (Lines of Effort - LoE)

• LoE-I: राष्ट्रीय मिशनों के साथ तालमेल
IndiaAI मिशन, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के साथ मिलकर स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करना।
• LoE-II: संरचना और इन्फ्रास्ट्रक्चर
सेना, उद्योग, अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना और सुरक्षित क्लाउड सिस्टम बनाना।
• LoE-III: डेटा तैयारी और उपयोग
निगरानी, साइबर डिफेंस, लॉजिस्टिक्स और प्रशिक्षण के लिए उपयोगी AI सिस्टम बनाना और सुरक्षित डाटा साझा करने की व्यवस्था करना।
• LoE-IV: स्मार्ट हथियार और पुराने सिस्टम का उन्नयन
ड्रोन, रोबोटिक वाहन जैसे स्वायत्त सिस्टम विकसित करना और पुराने हथियारों को AI आधारित सिस्टम से बेहतर बनाना।
• LoE-V: मानव संसाधन विकास
सैनिकों और अधिकारियों को AI, डेटा साइंस और नई तकनीकों की ट्रेनिंग देना।
• LoE-VI: AI गवर्नेंस
AI के नैतिक और कानूनी उपयोग की निगरानी के लिए Defence AI Governance Council बनाना।

11. सेना की AI पहलें

सरकार की नवाचार योजनाओं के अनुरूप, भारतीय सेना ने 18 दिसंबर 2024 को बेंगलुरु में Army AI Research and Incubation Centre (AARIC) शुरू किया। यह केंद्र DRDO, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर AI प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से आगे बढ़ाता है।

12. यूनिफ़ाइड AI प्लेटफ़ॉर्म

सेना एक Unified AI Platform बना रही है, जो ऑपरेशन, इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग को एक ही सुरक्षित फ्रेमवर्क में जोड़ेगा। इससे 24 घंटे के भीतर किसी भी AI समाधान को लागू किया जा सकेगा।

13. डिफेंस AI हब

DGIS और ArtPark-IISc मिलकर एक Defence AI Hub बना रहे हैं जो AI प्रोजेक्ट्स के प्रस्तावों, विक्रेताओं और प्रगति की निगरानी करेगा।

14. निष्कर्ष

इन पहलों के माध्यम से भारतीय सेना लगातार एक तकनीक-प्रधान और भविष्य के लिए तैयार सेना बन रही है। ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और AI के ज़िम्मेदार उपयोग से सेना न सिर्फ़ अपनी युद्धक क्षमता बढ़ा रही है बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भी अहम योगदान दे रही है।
 
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