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Gen Z और Alpha बच्चों को माता-पिता जरूर दें ये संस्कार, नहीं तो खतरे में पड़ सकता है समाज

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jun 16, 2025 12:59 pm IST,  Updated : Jun 16, 2025 04:16 pm IST

Important Values For Children: आजकल माता-पिता बच्चों को कम समय दे पा रहे हैं, जिसकी भरपाई वो बच्चों की सारी मांगें पूरी करके कर रहे हैं। इससे न सिर्फ बच्चों में संस्कारों की कमी हो रही है बल्कि गलत आदतें भी पैदा हो रही है। जिससे आने वाले वक्त में समाज खतरे में पड़ सकता है।

बच्चों के लिए जरूरी संस्कार- India TV Hindi
बच्चों के लिए जरूरी संस्कार Image Source : AI IMAGE

बच्चे देश और समाज का भविष्य हैं। एक वक्त था जब माता-पिता, घर के बड़े बुजुर्ग और शिक्षक मिलकर बच्चों में अच्छे संस्कार डालते थे जिससे उनके मजबूत चरित्र का निर्माण हो सके। ये बच्चे न सिर्फ नैतिक मूल्यों को बचाने बल्कि बेहतर समाज को बनाने में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में तकनीक और डिजिटल दौर में सब कुछ तेजी से बदल गया है। अब ज्यादातर माता पिता नौकरी वाले हो चुके हैं। घर में बच्चे या तो नौकरों के सहारे पल रहे हैं या फिर क्रेच में बचपन बीत रहा है। सिंगल फैमिली होने की वजह से घर में बड़े बुजुर्ग भी नहीं हैं जो उन्हें कुछ अच्छी बातें सिखा सकें। अगर किसी के घर में दादा-दादी या नाना-नानी हैं भी तो वो खुद फोन और रील्स की दुनिया में उलझे रहते हैं। ऐसे में बच्चे की सही परवरिश कैसे हो, कैसे बच्चों को नैतिक मूल्यों का ज्ञान हो ये बड़ा सवाल है। क्योंकि बच्चे ही समाज का निर्माण करते हैं।

बच्चों में संस्कार केवल कुछ नैतिक नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि ये व्यक्ति की आंतरिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीयता के मूल तत्त्व होते हैं। ये संस्कार सबसे पहले बच्चे के माता पिता ही उसे सिखाते हैं। घर में जैसा माहौल होता है बच्चे वो सबसे जल्दी सीखते हैं। परिवार के लोग आपस में कैसा व्यवहार करते हैं, कैसी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, माता पिता क्या निर्णय लेते हैं और उनकी प्रथमिकताएं क्या हैं इन सब बातों का बच्चों के दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए जो बच्चा अच्छे संस्कारों के साथ बड़ा होता है वो न सिर्फ अच्छा इंसान बनता है बल्कि समाज के प्रति भी संवेदनशील होता है। ऐसे में बच्चों में अच्छे संस्कारों की नींव बहुत जरूरी है।

नैतिक संस्कारों से दूर हो रहे हैं बच्चे

हालांकि अब बच्चों की परवरिश का तरीका काफी बदल चुका है। लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि माता-पिता अपना फर्ज निभाना बंद कर दें। कई माता पिता जो बच्चों को समय और संस्कार नहीं दे पाते वो उनकी गैर जरूरी मांगों को पूरा करके खुद को संतुष्ट कर लेते हैं। बच्चों की हर बात मानना, उन्हें बिना सही-गलत और जरूरत बताए हर इच्छा को पूरा करना गलत है। खासतौर से सिंगल बच्चों में ये समस्या सबसे ज्यादा हो रही है। ऐसे बच्चे हर चीज पर अपना अधिकार जमाते हैं और जब उनकी ये विश पूरी नहीं होती तो बच्चे जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव के हो जाते हैं। इतना ही नहीं ये बच्चों को उनका अपमान लगने लगता है। ये स्थिति माता-पिता और बच्चों के लिए खतरनाक है। इसलिए बच्चों को ये खास संस्कार जरूर दें।

बच्चों जरूर दें ये 5 संस्कार

पहला संस्कार- आजकल बच्चे बहुत सेल्फ सेंट्रिक बन गए हैं। इसका कारण माता-पिता का व्यवहार भी हो सकता है। इसलिए बच्चों को सिर्फ खुद के बारे में नहीं बल्कि समाज के बारे में भी सोचना सिखाएं है। ये बहुत जरूरी है कि आप दूसरों की तकलीफ, संवेदनाओं और जरूरतों के बारे में भी सोचें। आपको इस समाज के जिम्मेदार नागरिक बनने और उसके उत्तरदायित्वों को समझना भी जरूरी है। 

दूसरा संस्कार- स्वस्थ शरीर की अहमियत समझना आज की तारीख में बहुत जरूरी है। आजकल बच्चों के खाने-पीने की आदतें बहुत बदल गई हैं। घर का खाना उन्हें पसंद नहीं आता और ये बच्चे सिर्फ जीभ और स्वाद के लिए खाते हैं। ऐसे में आपका फर्ज बनता है कि बच्चों को हेल्दी भोजन और घर की बनी चीजें की अहमियत बताएं। सुबह जल्दी उठने, समय पर नहने, जल्दी सोने और समय पर खाने की स्वस्थ आदतें बच्चों में डालें।

तीसरा संस्कार- मोबाइल और टीवी की दुनिया में पल रहे बच्चे बहुत आलसी हो चुके हैं। बच्चों के अंदर किसी के लिए भी सेवा भाव नहीं है। जरा सा काम उन्हें बोल दो वो नहीं करते हैं। काम ही नहीं खेलने, कूदने और दौड़ने से भी ये बच्चे दूर भागते हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चों से घर के छोटे-मोटे काम करवाएं। अपने काम उन्हें खुद करने में मदद करें। बड़ो के कुछ काम करना उन्हें जरूर सिखाएं। इससे सेवा का भाव पैदा होता है।

चौथा संस्कार- आजकल के बच्चे धार्मिक चीजों से बहुत दूर हैं। बच्चों को रोजाना पूजा करना सिखाएं। उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़ने के लिए कहें। सिर्फ फोन या टीवी नहीं बल्कि किताबें पढ़ने की ओर उनकी रुचि विकसित करें। ये न सिर्फ उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि इससे बच्चों के अंदर संयम, सही गलत करने और तार्किक बुद्धि का विकास होगा।

पांचवां संस्कार- बच्चों को प्रकृति से प्रेम करना सिखाएं। प्राकृतिक चीजों का सही और सीमित इस्तेमाल करने के बारे में बताएं। उन्हें नेचर के नजदीक लेकर जाएं। गांव लेकर जाएं इससे उन्हें जड़ों की मजबूती का अहसास होगा। बच्चों को मिट्टी में खेलना सिखाएं और सूरज की रौशनी में तपने की आदत डालें। इससे उनका शरीर और दिमाग दोनों मजबूत बनेंगे। 

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