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क्यों शिवजी के हर मंदिर में भगवान शंकर से पहले होती है नंदी की मूर्ति?

आपने देखा होगा कि लोग मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन से पहले नंदी के आगे हाथ जोड़ते हैं, उनके कानों में अपनी मन्नत मांगते हैं, इसके पीछे क्या वजह है? और इसका रहस्य क्या है आइए आपको बताते हैं।

Jyoti Jaiswal Written by: Jyoti Jaiswal @TheJyotiJaiswal
Published on: May 16, 2022 19:12 IST
क्यों शिवजी के हर मंदिर में भगवान शंकर से पहले होती है नंदी की मूर्ति? - India TV Hindi
Image Source : PIXABAY क्यों शिवजी के हर मंदिर में भगवान शंकर से पहले होती है नंदी की मूर्ति? 

नंदी भगवान भोलेनाथ के वाहन हैं, उन्हें भगावन भोलेनाथ का द्वारपाल भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करनी है तो उनकी सवारी नंदी को खुश करना जरूरी है। आपने देखा होगा कि लोग मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन से पहले नंदी के आगे हाथ जोड़ते हैं, उनके कानों में अपनी मन्नत मांगते हैं, इसके पीछे क्या वजह है? और इसका रहस्य क्या है आइए आपको बताते हैं।

शिव के सबसे बड़े भक्त हैं नंदी

जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था उस वक्त भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर इस संसार को बचाया था, विष की कुछ बूंदे जमीन पर गिर गई थीं, जिसे नंदी ने जीभ से चाट लिया था, नंदी का ये समर्पण देखकर भगवान शिव ने उन्हें अपने सबसे बड़े भक्त की उपाधि दी और ये आशीर्वाद दिया कि उनके दर्शन से पहले लोग नंदी के दर्शन करेंगे।

नंदी की कृपा

नंदी को भगवान शिव का द्वारपाल कहा जाता है। भगवान शिव के दर्शन से पहले नंदी के दर्शन करने होते हैं, नंदी भक्त की परीक्षा लेते हैं, जो इस परीक्षा में पास होते हैं नंदी उसके लिए भगवान शिव के द्वार खोलते हैं। भगवान शिव से पहले भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामना बोलते हैं, नंदी ने अगर आपकी मनोकामना शिवजी को बता दी तो शिवजी आपकी वो इच्छा जरूर पूरी करेंगे।

कैसे बने नंदी शिव के गण

कहा जाता है कि शिव की कठिन तपस्या के बाद शिलाद ऋषि ने नंदी को पुत्र के रूप में पाया था, नंदी को उनके पिता ने संपूर्ण वेदों का ज्ञान दिया। एक दिन शिलाद ऋषि के आश्रम में दो दिव्य ऋषि आए, नंदी ने उन दोनों ऋषियों की खूब सेवा की, ऋषि बहुत प्रसन्न हुए उन्होंने शिलाद ऋषि को तो लंबी उम्र का वरदान दिया लेकिन नंदी को नहीं दिया। जब शिलाद ऋषि ने उन दिव्य ऋषियों से इसका कारण जानना चाहा तो, उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु है। यह सुनकर ऋषि शिलाद चिंतित हो गए, जब नंदी ने पिता से चिंता की वजह पूछी तो उन्होंने उसे सच्चाई बता दी। इस पर नंदी हंसने लगे और कहा कि शिव जी की कृपा से आपने मुझे प्राप्त किया था और वही मेरी रक्षा करेंगे। इसके बाद नंदी ने भुवन नदी के किनारे शिव जी की कठिन तपस्या की। शिवजी प्रकट हुए तो नंदी ने कहा कि वो उम्रभर उनके सानिध्य में रहना चाहता हूं। नंदी के समर्पण से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें बैल का चेहरा देकर अपना वाहन बनाकर अपने गण में शामिल कर लिया। साथ ही ये आशीर्वाद भी दिया कि जहां उनका निवास होगा वहां नंदी भी होंगे। 

नंदी का विवाह

नंदी का विवाह मरुतों की पुत्री सुयशा से हुआ है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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