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Sawan 2022: कब से शुरू हो रहा है महादेव का प्रिय माह सावन? जानिए तिथि, महत्व और पूजा विधि

Sawan 2022: आइए जानते हैं कब से शुरू हो रहा है सावन का पवित्र माह, साथ ही जानिए तिथियां, महत्व और मंत्र।

Sushma Kumari Written by: Sushma Kumari @ISushmaPandey
Updated on: June 21, 2022 13:10 IST
Sawan 2022 - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Sawan 2022 

Highlights

  • महादेव का प्रिय माह सावन 14 जुलाई 2022 से शुरू हो रहा है।
  • सावन 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो रहा है।

Sawan 2022:  हिंदू धर्म में सावन महीने का काफी अधिक महत्व है। इस माह में हर दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार सावन माह को भगवान शंकर का माह माना जाता है। इस साल 18 जुलाई से 12 अगस्त तक सावन का माह पड़ेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कब से शुरू हो रहा है सावन का पवित्र माह, साथ ही जानिए  तिथियां, महत्व और मंत्र। 

जानिए कब से शुरू हो रहा है सावन 2022

ज्योतिषि के अनुसार, महादेव का प्रिय माह सावन 14 जुलाई 2022 से शुरू हो रहा है और 12 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो रहा है।

जानिए सावन माह में पड़ने वाले सोमवार की तिथियां

  • सावन मास का पहला दिन - 14  जुलाई 2022, दिन गुरुवार
  • सावन सोमवार व्रत - 18 जुलाई 2022, सोमवार
  • सावन सोमवार व्रत - 25 जुलाई 2022, सोमवार
  • सावन सोमवार व्रत -  01 अगस्त 2022 सोमवार
  • सावन सोमवार व्रत - 08 अगस्त 2022,  सोमवार
  • सावन मास का अंतिम दिन - 12 अगस्त 2022, शुक्रवार

सावन का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास हिंदी कैलेंडर में पांचवें स्थान पर आता है। मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना  भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के लिए बेहद ही खास होता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सावन के हर सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सावन महीने में करें इस मंत्र का जाप 

  • ॐ नमः शिवाय
  • प्रौं ह्रीं ठः
  • ऊर्ध्व भू फट्
  • इं क्षं मं औं अं
  • नमो नीलकण्ठाय
  • ॐ पार्वतीपतये नमः
  • ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय
  • ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा
  • ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ

महामृत्युंजय जप

ऊं हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं।

डिस्क्लेमर - ये आर्टिकल जन सामान्य सूचनाओं और लोकोक्तियों पर आधारित है। इंडिया टीवी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता।

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