महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक आदित्य ठाकरे की मुंबई के एक ही होटल में मौजूदगी ने सियासी गलियारों में नए समीकरणों की चर्चाओं को हवा दे दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मात्र दो दिन पहले ही उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच मुलाकात हुई थी।
सूत्रों के अनुसार, फडणवीस और आदित्य ठाकरे दोनों मुंबई के सॉफिटेल होटल में मौजूद थे। हालांकि दोनों नेता अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए वहां पहुंचे थे और आपस में मुलाकात नहीं हुई। इस संयोग पर आदित्य ठाकरे ने अनौपचारिक रूप से कहा कि वह अपने किसी दोस्त के डिनर के बुलावे पर होटल गए थे, लेकिन जिसे जो अर्थ लगाना है लगाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस खबर से किसी (एकनाथ शिंदे) को जलन होगी। वहीं, बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने भी ऑफ रिकॉर्ड बताया कि दोनों नेता एक ही होटल में थे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हुई। दोनों अपने-अपने अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए आए थे।
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उद्धव ठाकरे को सरकार में शामिल होने की खुली पेशकश के बाद आया है। फडणवीस ने हाल ही में एक परिषद में कहा था, "उद्धवजी, 2029 तक हमारे पास सरकार में आने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन अगर आपको सत्ता में आना है तो रास्ता खुला है। हम अलग तरीके से बात करेंगे। ठाकरे गुट की शिवसेना आज भी हमारी मित्र पार्टी है।"
इस पेशकश पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा था, "सभागृह में ये बातें सौहार्द्रपूर्ण तरीके से हुई हैं और इन्हें उसी भावना से लेना चाहिए।" उद्धव और फडणवीस के बीच बंद कमरे में बीस मिनट की चर्चा भी हुई थी, जिस पर उद्धव ने कहा था कि यह "अंदर की बात" है। हालांकि, 'सामना' को दिए एक इंटरव्यू में उद्धव ने स्पष्ट किया था कि फडणवीस मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनसे मुलाकात हुई थी।
कुछ दिनों पहले भी विधानपरिषद के सभापति राम शिंदे के कक्ष में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात हुई थी। इस पर फडणवीस ने सफाई देते हुए कहा था, "मैंने कल ठाकरे जी द्वारा दिया गया ‘हिंदी सक्ती हवीच कशाला’ नामक पुस्तक पढ़ा। कोई किसी से मिल ले तो इसका मतलब गठबंधन की बात हो, ऐसा जरूरी नहीं है।"
इन लगातार मुलाकातों और संयोग को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भाजपा और शिवसेना (ठाकरे गुट) के बीच फिर से किसी नए गठबंधन की तैयारी चल रही है? या यह सब केवल औपचारिक मुलाकातें हैं? भले ही आधिकारिक रूप से इसे महज एक संयोग बताया जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर हलचल और अटकलें तेज हो गई हैं।
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