मुंबई: एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्य की डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने वाली हैं। सुनेत्रा साल 2024 से पहले राजनीति में सक्रिय रूप से नहीं थीं लेकिन वह पहली बार 2024 में ही चुनावी राजनीति में उतरीं। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
मराठा परिवार में हुआ पालन-पोषण
सुनेत्रा का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (वर्तमान धराशिव) में हुआ था। उनका पालन-पोषण एक मराठा परिवार में हुआ, जिसकी स्थानीय राजनीति में गहरी जड़ें थीं। उनके पिता, बाजीराव पाटिल, एक प्रख्यात स्थानीय राजनीतिज्ञ थे, और उनके भाई, पद्मसिंह बाजीराव पाटिल, 1980 के दशक के दौरान जिले में काफी प्रभावशाली नेता थे। इस वजह से सुनेत्रा ने बचपन से ही राजनीतिक माहौल को देखा
उन्होंने 1983 में औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एस बी आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि हासिल की है। इसके बाद दिसंबर 1985 में, उन्होंने अजित पवार से शादी की। ये एक अरेंज मैरिज थी, जिसे उनके भाई ने तय किया था।
सोशल वर्क से लगाव
सुनेत्रा पवार साल 2024 से पहले मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहीं लेकिन उनका सोशल वर्क से काफी लगाव रहा। उन्होंने सबसे पहले बारामती और उसके आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक कार्य किया। उनकी सबसे चर्चित पहलों में से एक पवार परिवार के पैतृक गांव काठवाड़ी में शुरू हुई, जहां उन्होंने खुले में शौच और स्वच्छता की कमी की समस्या का मुद्दा उठाया और अभियान चलाकर लोगों को प्रेरित किया। नतीजा ये निकला कि काठवाड़ी को 2006 में केंद्र सरकार द्वारा 'निर्मल ग्राम' का दर्जा दिया गया।
बाद में ये गांव सौर ऊर्जा से चलने वाली स्ट्रीटलाइट्स, बायोगैस संयंत्रों, व्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खेती के साथ एक आदर्श पर्यावरण-अनुकूल गांव के रूप में विकसित हुआ। जिससे गांव को कई पुरस्कार मिले।
राजनीति में प्रवेश और राज्यसभा में भूमिका
कार्यकर्ता मानते हैं कि सुनेत्रा पर्दे के पीछे अजित पवार के अहम सलाहकारों में शामिल रहीं। 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर नेशलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को हासिल किया, तब पवार फैमिली में हालात बदल गए।
2024 सुनेत्रा पवार ने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला ननद सुप्रिया सुले से था। इस चुनाव में सुनेत्रा पवार को 1.5 लाख से अधिक वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद अजित पवार ने सुनेत्रा पवार को राजसभा की राह दिखाई।


