1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 45 छात्र बीमार, 38 हॉस्पिटल में एडमिट कराए गए, 10 की हालत गंभीर

सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 45 छात्र बीमार, 38 हॉस्पिटल में एडमिट कराए गए, 10 की हालत गंभीर

 Reported By: T Raghavan, Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jan 31, 2026 09:28 am IST,  Updated : Jan 31, 2026 09:35 am IST

तेलंगाना के कोनिजेरला मंडल के बोडियाथांडा सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील खाने के छात्रों की हालत बिगड़ गई। 38 हॉस्पिटल में एडमिट कराए गए, जिनमें 10 की हालत गंभीर है।

Telangana- India TV Hindi
38 हॉस्पिटल में एडमिट कराए गए, जिनमें 10 की हालत गंभीर Image Source : FREEPIK/REPRESENTATIVE PIC

कोनिजेरला: तेलंगाना के कोनिजेरला मंडल के बोडियाथांडा सरकारी प्राइमरी स्कूल के 38 छात्रों को शुक्रवार (30 जनवरी) को फूड प्वाइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह घटना संगारेड्डी जिले के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 45 छात्रों के बीमार पड़ने के एक दिन बाद हुई है।

छात्रों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखे। गांव वालों, माता-पिता और स्कूल स्टाफ ने तुरंत प्रभावित छात्रों को खम्मम सरकारी अस्पताल पहुंचाया। उन सभी का अभी इलाज चल रहा है।

क्या होता है मिड डे मील?

सरकारी प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील वह योजना है, जिसके तहत बच्चों को दोपहर का खाना स्कूल की तरफ से खिलाया जाता है। यह स्कूल की तरफ से बिल्कुल फ्री होता है और ताजा ही बनाया जाता है। ये भोजन नियमानुसार पौष्टिक होता है और इसमें न्यूनतम कैलोरी, प्रोटीन और विटामिन होता है।

इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में भूख कम करना और पोषण स्तर सुधारना है। इसका एक और प्रमुख उद्देश्य स्कूल में नामांकन बढ़ाना, उपस्थिति बेहतर करना और ड्रॉपआउट रोकना है। इससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों के लिए प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि कई बच्चे खाली पेट स्कूल आते हैं।

इससे सामाजिक समानता भी बढ़ती है और सभी बच्चे साथ बैठकर खाते हैं। इससे जाति/वर्ग के भेदभाव कम होते हैं और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।

हालांकि पहले भी इस तरह के मामले आए हैं, जब मिड डे मील खाने से बच्चे बीमार पड़े हैं। इसकी मुख्य वजह साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना और खाने की उच्च गुणवत्ता का खयाल नहीं रखना है। इसके पीछे जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि ये बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ का मामला है। गरीब बच्चे आवाज नहीं उठाते, इसलिए इस तरह खाने की गुणवत्ता से समझौता किया जाता है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत