Sammakka Saralamma Jathara: तेलंगाना के ऐतिहासिक मेदाराम सम्मक्का-सरलम्मा महा जतारा का पहला चरण पूरा हो गया है। इसको तेलंगाना का कुंभ मेला भी कहा जाता है। बुधवार शाम को देवी सरलम्मा पवित्र चबूतरे गद्देलु पर विराजमान हुईं। देवी सरलाम्मा को आदिवासी देवताओं पगिडिद्दा राजू और गोविंदराजुलु के साथ विधि-विधान से चबूतरे पर स्थापित किया गया। जनजातीय महोत्सव के मुख्य आयोजनों की औपचारिक शुरुआत भी इसी के साथ हो गई।
वजन के बराबर गुड़ चढ़ाने की परंपरा
बता दें कि तेलंगाना में हर 2 साल में मेदाराम सम्मक्का-सरलम्मा महा जतारा उत्सव मनाया जाता है। मेदाराम सम्मक्का-सरलम्मा महा जतारा के दौरान, लाखों भक्त अपने शरीर के वजन के बराबर गुड़ देवी सम्मक्का और सरलाम्मा को चढ़ाते हैं। यह अर्पण इस फेस्टिवल का एक प्रमुख अनुष्ठान है, जो अक्सर देवताओं से सेहत, समृद्धि या कामयाबी के लिए की गई कामनाओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।
गुड़ ही क्यों चढ़ाया जाता है?
गौरतलब है कि यह परंपरा कोया जनजाति के जंगल से जुड़ाव और काकतीय राजवंश की तरफ से लगाए गए टैक्स के अत्याचार के खिलाफ उनके विरोध से पैदा हुई है। यह एक सांकेतिक भेंट के तौर पर होता है, जिसको बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह उत्सव हर दो साल बाद माघ मेले में मनाया जाता है। इस दौरान Jampanna Vagu के घाट पर स्नान भी किया जाता है और फिर पूजा करते हैं।
मंत्री ने भी किया पारंपरिक नृत्य
कन्नेपल्ली मंदिर में जनजातीय रीति रिवाजों के मुताबिक, प्रमुख पुजारी के नेतृत्व में पूजा की गई। तेलंगाना के पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री दानासारी अनुसूया सीताक्का और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी इस समय मौजूद रहे और विशेष प्रार्थनाएं कीं। इस दौरान, राज्य मंत्री सीताक्का ने लोकल लोगों के साथ पारंपरिक आदिवासी डांस में भी भाग लिया।
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