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Vinayak Chaturthi Vrat Katha: विनायक चतुर्थी पर जरूर करें गणेश भगवान और बुढ़िया माई की इस कथा का पाठ, बप्पा की होगी विशेष कृपा

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jan 21, 2026 11:30 pm IST,  Updated : Jan 21, 2026 11:37 pm IST

Vinayak Chaturthi Vrat Katha: यह भगवान गणेश को समर्पित पावन व्रत है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार महीने में दो बार आता है। इसे गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा के साथ बुढ़िया माई की कथा का पाठ करते हैं। यहां पढ़िए पूरी कथा।

Vinayak Chaturthi Vrat Katha- India TV Hindi
विनायक चतुर्थी पर पढ़े गणेश भगवान और बुढ़िया माई की कथा Image Source : PEXELS

Vinayak Chaturthi Vrat Katha: विनायक चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने का पर्व है, जिसे भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मनाते हैं। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी कहते हैं और शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि विनायक गणेश चतुर्थी होती है। 22 जनवरी विनायक गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि विनायक चतुर्थी पर सच्चे मन से पूजा और कथा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन पूजा, व्रत और कथा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि बिना व्रत कथा के कोई भी उपासना पूर्ण नहीं मानी जाती। यहां पढ़िए विनायक चतुर्थी की संपूर्ण व्रत कथा

गणेश भगवान और बुढ़िया माई की कहानी (Ganesh Ji Aur Budhiya Maai Ki Kahani)

एक गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी, जो अत्यंत गरीब थी लेकिन उसकी श्रद्धा अपार थी। वह रोज़ सुबह मिट्टी से भगवान गणेश की छोटी-सी मूर्ति बनाती और पूरे मन से उनकी पूजा करती। उसकी यही दिनचर्या थी। लेकिन उसकी एक बड़ी परेशानी थी—मिट्टी के गणेश जी रोज़-रोज़ गल जाते थे और अगले दिन उसे फिर नई मूर्ति बनानी पड़ती थी।

बुढ़िया माई की इच्छा थी कि उसके पास पत्थर के गणेश हों, ताकि वह रोज़-रोज़ नई मूर्ति न बनानी पड़े और उसकी पूजा हमेशा बनी रहे। उसके घर के पास ही एक सेठ जी का बड़ा मकान बन रहा था। वहां कई मिस्त्री काम कर रहे थे। एक दिन बुढ़िया माई मिस्त्रियों के पास गई और हाथ जोड़कर बोली, "बेटा, मेरे लिए पत्थर के गणेश जी बना दो।"

मिस्त्रियों ने उसकी बात सुनी, लेकिन मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "जिस समय में हम तेरे लिए पत्थर के गणेश बनाएंगे, उतने समय में तो हमारी दीवार भी न बन पाएगी।"

यह सुनकर बुढ़िया माई को बहुत दुख हुआ। उसकी भक्ति का अपमान हुआ था। वह क्रोधित होकर बोली, "राम करे, तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए।"

जैसे ही बुढ़िया माई ने यह कहा, वैसा ही हुआ। मिस्त्री दीवार बनाते, लेकिन वह बार-बार टेढ़ी हो जाती। वे दीवार गिराते, फिर बनाते, लेकिन हर बार वही हाल होता। पूरा दिन इसी में बीत गया और शाम तक एक ईंट भी ठीक से न लग सकी।

शाम को जब सेठ जी आए और उन्होंने देखा कि सारा दिन बीत जाने के बाद भी दीवार नहीं बनी है, तो उन्होंने मिस्त्रियों से कारण पूछा। मिस्त्रियों ने सारी बात सेठ जी को बता दी—बुढ़िया माई का आना, गणेश जी की मांग और दिया गया श्राप।

सेठ जी समझ गए कि यह कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने तुरंत बुढ़िया माई को बुलवाया और आदर से कहा, "माई, हम तेरे लिए सोने के गणेश जी बनवा देंगे, बस हमारी दीवार को सीधा कर दो।"

बुढ़िया माई ने सच्चे मन से भगवान गणेश का स्मरण किया। जैसे ही सोने के गणेश जी बनाए गए, सेठ जी की दीवार अपने आप सीधी बन गई।

तभी से यह प्रार्थना कही जाती है: 

"हे गणेश भगवान, जैसे आपने सेठ की दीवार सीधी की, वैसे ही सबके जीवन की टेढ़ी राहों को भी सीधा कर दीजिए।"

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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