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Ganesh Jayanti 2026 Live: गणेश जयंती पर ऐसे करें बप्पा को प्रसन्न, जानें पूजा विधि से लेकर व्रत कथा तक सब कुछ

Ganesh Jayanti 2026 Live: आज 22 जनवरी 2026 को माघी गणेश जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इसे माघ विनायक चतुर्थ और तिलकुंडा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। यहां आप जानेंगे माघी गणेश चतुर्थी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, मंत्र, चंद्रोदय समय समेत सारी जानकारी।

Written By : Acharya Indu Prakash Edited By : Laveena Sharma Published : Jan 22, 2026 07:35 am IST, Updated : Jan 22, 2026 08:43 am IST
ganesh jayanti- India TV Hindi
Image Source : CANVA गणेश जयंती 2026

Ganesh Jayanti 2026 Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Vrat Katha, Moonrise Time, Bhog Live: गणेश जयंती का पावन पर्व हर साल माघ महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं अनुसार इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस शुभ अवसर पर भक्त भगवान गणेश की विधि विधान पूजा करते हैं और उन्हें तरह-तरह की चीजों का भोग लगाते हैं। ये पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र व कोंकण के तटीय क्षेत्रों में मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित होता है। यहां आप जानेंगे गणेश जयंती की पूजा विधि से लेकर व्रत कथा तक सबकुछ।

गणेश जयंती 2026 शुभ मुहूर्त (Ganesh Jayanti 2026 Shubh Muhurat)

  • गणेश जयन्ती - 22 जनवरी 2026, गुरुवार
  • गणेश जयंती पूजा मुहूर्त - 11:29 AM से 01:37 PM
  • गणेश जयंती पर वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:22 AM से 09:19 PM
  • चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 22 जनवरी 2026 को 02:47 AM बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त - 23 जनवरी 2026 को 02:28 AM बजे

गणेश जयंती पूजा विधि (Ganesh Jayanti Puja Vidhi)

  • गणेश जयंती के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत रखने का संकल्प लें।
  • भगवान गणेश की पूजा और आरती करें।
  • इस पर्व की मुख्य पूजा दोपहर के समय होती है तो ऐसे में पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले सारी जरूरी सामग्री एकत्रित कर लें।
  • शुभ मुहूर्त में सबसे पहले गणेश जी की प्रतिमा किसी चौकी पर स्थापित करें। 
  • फिर भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें।
  • इसके बाद गणेश जी को फूल चढ़ाएं और तिलक लगाएं।
  • धूप जलाएं और भगवान को अक्षत अर्पित करें।
  • साथ ही भगवान को पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, हल्दी, इलायची और मौसमी फल भी जरूर अर्पित करें। 
  • नए वस्त्र, जनेऊ और दूर्वा भी जरूर चढ़ाएं।
  • भोग स्वरूप मोदक, लड्डू और पंचमेवा चढ़ाएं। 
  • इसके बाद गणेश जयंती की व्रत कथा सुनें।
  • साथ ही गणेश जी के मंत्रों और चालीसा का पाठ करें।
  • उसके बाद गणेश जी की आरती उतारें और क्षमा प्रार्थना करें।
  • दिनभर व्रत रहें और संभव हो तो रात में जागरण करें।
  • फिर अगले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा-पाठ के बाद अपना व्रत खोल लें।

Live updates :Ganesh Jayanti 2026 Live

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  • 8:43 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Jayanti 2026: गणेश जयंती पर वर्जित चंद्र दर्शन समय

    गणेश जयंती पर चांद के दर्शन करना अशुभ माना जाता है। आज यानी 22 जनवरी को वर्जित चंद्र दर्शन समय सुबह 09:22 से रात 09:19 बजे तक रहेगा।

     

  • 8:16 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जयंती पूजा मुहूर्त 2026 (Ganesh Jayanti Puja Muhurat 2026)

    • महाराष्ट्र - 11:39 ए एम से 01:53 पी एम 
    • नई दिल्ली - 11:29 ए एम से 01:37 पी एम 
    • तमिलनाडु - 11:12 ए एम से 01:30 पी एम 
    • राजस्थान - 11:34 ए एम से 01:43 पी एम 
    • आंध्र प्रदेश - 11:20 ए एम से 01:35 पी एम 
    • हरियाणा - 11:30 ए एम से 01:37 पी एम 
    • पश्चिम बंगाल - 10:42 ए एम से 12:54 पी एम 
    • कर्नाटक - 11:22 ए एम से 01:40 पी एम 
    • उत्तर प्रदेश - 11:28 ए एम से 01:36 पी एम
    • बिहार - 10:56 ए एम से 01:06 पी एम
    • हिमाचल प्रदेश - 11:30 ए एम से 01:36 पी एम
  • 8:02 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जयंती का महत्व (Ganesh Jayanti Ka Mahatva)

    गणेश जयंती का व्रत रखने से जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। ये व्रत जीवन में सुख-समृद्धि लाता है और भगवान गणेश की विशेष कृपा दिलाता है।

  • 7:40 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी के 21 नाम (Ganesh Ji Ke 21 Naam)

    1. सुमुख - ॐ सुमुखाय नमः।
    2. गणाधीश - ॐ गणाधीशाय नमः।
    3. उमा पुत्र - ॐ उमा पुत्राय नमः।
    4. गजमुख - ॐ गजमुखाय नमः।
    5. लम्बोदर - ॐ लम्बोदराय नमः।
    6. हरसून - ॐ हर सूनवे नमः।
    7. शूर्पकर्ण - ॐ शूर्पकर्णाय नमः।
    8. वक्रतुण्ड - ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
    9. गुहाग्रज - ॐ गुहाग्रजाय नमः।
    10. एकदन्त - ॐ एकदन्ताय नमः।
    11. हेरम्ब - ॐ हेरम्बराय नमः।
    12. चतुर्होत्र - ॐ चतुर्होत्रै नमः।
    13. सर्वेश्वर - ॐ सर्वेश्वराय नमः।
    14. विकट - ॐ विकटाय नमः।
    15. हेमतुण्ड - ॐ हेमतुण्डाय नमः।
    16. विनायक - ॐ विनायकाय नमः।
    17. कपिल - ॐ कपिलाय नमः।
    18. वटवे - ॐ वटवे नमः।
    19. भालचन्द्र - ॐ भाल चन्द्राय नमः।
    20. सुराग्रज - ॐ सुराग्रजाय नमः।
    21. सिद्धि विनायक - ॐ सिद्धि विनायकाय नमः।
  • 7:36 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Jayanti Vrat Katha: गणेश जयंती व्रत कथा

    एक गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी, जो अत्यंत गरीब थी लेकिन उसकी श्रद्धा अपार थी। वह रोज़ सुबह मिट्टी से भगवान गणेश की छोटी-सी मूर्ति बनाती और पूरे मन से उनकी पूजा करती। उसकी यही दिनचर्या थी। लेकिन उसकी एक बड़ी परेशानी थी—मिट्टी के गणेश जी रोज़-रोज़ गल जाते थे और अगले दिन उसे फिर नई मूर्ति बनानी पड़ती थी।

    बुढ़िया माई की इच्छा थी कि उसके पास पत्थर के गणेश हों, ताकि वह रोज़-रोज़ नई मूर्ति न बनानी पड़े और उसकी पूजा हमेशा बनी रहे। उसके घर के पास ही एक सेठ जी का बड़ा मकान बन रहा था। वहां कई मिस्त्री काम कर रहे थे। एक दिन बुढ़िया माई मिस्त्रियों के पास गई और हाथ जोड़कर बोली, "बेटा, मेरे लिए पत्थर के गणेश जी बना दो।"

    मिस्त्रियों ने उसकी बात सुनी, लेकिन मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "जिस समय में हम तेरे लिए पत्थर के गणेश बनाएंगे, उतने समय में तो हमारी दीवार भी न बन पाएगी।"

    यह सुनकर बुढ़िया माई को बहुत दुख हुआ। उसकी भक्ति का अपमान हुआ था। वह क्रोधित होकर बोली, "राम करे, तुम्हारी दीवार टेढ़ी हो जाए।"

    जैसे ही बुढ़िया माई ने यह कहा, वैसा ही हुआ। मिस्त्री दीवार बनाते, लेकिन वह बार-बार टेढ़ी हो जाती। वे दीवार गिराते, फिर बनाते, लेकिन हर बार वही हाल होता। पूरा दिन इसी में बीत गया और शाम तक एक ईंट भी ठीक से न लग सकी।

    शाम को जब सेठ जी आए और उन्होंने देखा कि सारा दिन बीत जाने के बाद भी दीवार नहीं बनी है, तो उन्होंने मिस्त्रियों से कारण पूछा। मिस्त्रियों ने सारी बात सेठ जी को बता दी—बुढ़िया माई का आना, गणेश जी की मांग और दिया गया श्राप।

    सेठ जी समझ गए कि यह कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने तुरंत बुढ़िया माई को बुलवाया और आदर से कहा, "माई, हम तेरे लिए सोने के गणेश जी बनवा देंगे, बस हमारी दीवार को सीधा कर दो।"

    बुढ़िया माई ने सच्चे मन से भगवान गणेश का स्मरण किया। जैसे ही सोने के गणेश जी बनाए गए, सेठ जी की दीवार अपने आप सीधी बन गई।

    तभी से यह प्रार्थना कही जाती है: 

    "हे गणेश भगवान, जैसे आपने सेठ की दीवार सीधी की, वैसे ही सबके जीवन की टेढ़ी राहों को भी सीधा कर दीजिए।"

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