Hindu Nav Varsh 2026 (हिंदू नव वर्ष 2083): पंचांग अनुसार हिंदू नववर्ष यानी नया सम्वत्सर चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। बता दें सम्वत्सर साठ वर्षों का चक्र होता है, जिसमें प्रत्येक वर्ष का एक अलग नाम होता है। उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2026) के पहले दिन को नव सम्वत्सर या हिंदू नूतन वर्ष (Hindu Nutan Varsh 2026) के रूप में मनाया जाता है, जबकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे उगादी (Ugadi 2026) के रूप में तो वहीं महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa 2026) के रूप में मनाया जाता है। नए साल के पहले दिन लोग अपने घरों को फूल, तोरण और शुभ वस्तुओं से सजाते हैं। साथ ही घर के मंदिर में दीपक जलाकर विधि विधान पूजा करते हैं। चलिए जानते हैं हिंदू नव वर्ष 2083 का देश-दुनिया और राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से हो रही है। ये रौद्र संवत्सर कहलाएगा। इस वर्ष के राजा गुरु हैं तो मंत्री मंगल देव हैं। वहीं सेनाधिपति चंद्र देव हैं। नया साल उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग में शुरू हो रहा है।
हिंदू नववर्ष 2083 में ज्येष्ठ का महीना बढ़ रहा है, जिसके कारण इस वर्ष 12 के बजाय 13 महीने होंगे। अधिकमास लगने के कारण ज्येष्ठ महीना 58-59 दिनों का होगा। अधिकमास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा।
हिंदू नववर्ष 2083 के राजा गुरु, मन्त्री मंगल और सेनाधिपति चंद्र देव हैं। जानिए इसका देश-दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
पंचांग अनुसार नववर्ष 2083 के राजा देवगुरु बृहस्पति के राज्यकाल में सोने के समान वर्षा की धारायें होती हैं, गायें अच्छा दूध देती हैं। ब्राह्मण यज्ञ और महोत्सवों में प्रसन्नचित्त रहते हैं और फल-फूल इत्यादि की प्रचुर मात्रा में उत्पत्ति होती है। कुल मिलाकर राजा गुरु अच्छे परिणाम देते हैं।
पंचांग अनुसार जब किसी वर्ष के मंत्री मंगल देव होते हैं, तब कहीं-कहीं ही वर्षा होती है। साथ ही अन्न के मूल्यों में भी वृद्धि हो जाती है। मंगल के कारण अग्नि का प्रकोप अधिक होता है। चोरी बढ़ जाती है और राजा युद्ध के लिए तैयार रहते हैं।
कहते हैं जब नए साल के सेनाधिपति चन्द्रदेव होते हैं, तब राजनेता उत्तम शासन करते हैं। लोगों के जीवन स्तर में उन्नति होती है। प्रजा अपने राजा यानी अपने राजनेताओं की व्यवस्था से प्रसन्न रहती है। दूध का उत्पादन काफी अच्छा होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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