Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों के घाट पर भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं और और पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। हालांकि कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनके घर के आसपास नदियां नहीं होती और कई लोग अन्य कारणों से भी पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि बिना नदियों में पवित्र स्नान किए भी कैसे शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए गए कार्य घर पर ही संपन्न करने चाहिए।
माघ पूर्णिमा के दिन घर पर करें ये उपाय
घर पर स्नान के दौरान करें ये काम- माघ पूर्णिमा के दिन आपको घर पर स्नान करते समय कुछ बूंदें गंगाजल की पानी में मिलानी चाहिए। अगर गंगाजल न हो तो नहाते समय 'गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिंधु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।।' मंत्र का जप आपको करना चाहिए। ऐसा करने से गंगा में डुबकी लगाने जितना पुण्य फल आपको प्राप्त होता है।
घर पर करें तुलसी पूजन- पूर्णिमा तिथि के दिन तुलसी का पूजन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए जो लोग पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पा रहे हैं उन्हें तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना चाहिए और तुलसी की परिक्रमा करनी चाहिए।
श्री सत्यनारायण की कथा का करें पाठ- सत्यनारायण की कथा का पाठ भी आप माघ पूर्णिमा के दिन घर पर कर सकते हैं। इस कथा का पाठ करना आपके पारिवारिक जीवन में सुख शांति लाता है और साथ ही आपको भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।
मंत्रों का जप- माघ पूर्णिमा के दिन आपको एकांत स्थल पर बैठकर देवी गंगा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और भोलेनाथ, अपने इष्ट देव और पितरों के मंत्र का जप करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
दान- माघ पूर्णिमा के दिन दान का भी बड़ा महत्व है इसलिए आपको इस दिन दान भी अवश्य करना चाहिए। इस दिन तिल, गुड़, घी, कंबल, अन्न और धन का दान आपको करना चाहिए। इन चीजों का दान करने से देवी-देवता आप पर कृपा बरसाते हैं और पितृ भी प्रसन्न होते हैं।
चंद्र पूजन- माघ पूर्णिमा के दिन आपको घर पर ही चंद्र पूजन करना चाहिए। चंद्र पूजन के लिए रात्रि का समय सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान चंद्रमा को जल का अर्घ्य देना चाहिए और चंद्र मंत्रों का जप करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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