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UP में सरकारी जमीन और तालाबों से 90 दिन में हटाएं अतिक्रमण, इलाहाबाद HC का सख्त आदेश

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Oct 14, 2025 10:50 pm IST, Updated : Oct 14, 2025 10:53 pm IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन या आम जनता के उपयोग के उद्देश्य से आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण 90 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट- India TV Hindi
Image Source : FILE (PTI) इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन, ग्राम समाज की भूमि और आम जनता के उपयोग के लिए आरक्षित जलाशयों पर हुए सभी अतिक्रमणों को हटाने के संबंध में निर्देश जारी किया है। न्यायालय ने यह काम 90 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति पीके गिरि की एकल पीठ ने अतिक्रमण की सूचना देने या उसे हटाने में ग्राम प्रधानों, लेखपालों और राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस निष्क्रियता को आपराधिक विश्वासघात के समान बताया।

अदालत ने निर्देश दिया है कि जो अधिकारी कानून के मुताबिक कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए और आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएं। न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों की यह विफलता भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात है, और इस पर तुरंत आपराधिक मुकदमा शुरू किया जाना चाहिए।

क्या है मामला?

यह आदेश मनोज कुमार सिंह नाम के एक शख्स की ओर से दायर जनहित याचिका पर पारित किया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मिर्ज़ापुर के चुनार स्थित ग्राम चौका में एक तालाब पर ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर लिया है, लेकिन शिकायत के बावजूद स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

जल संरक्षण पर कोर्ट का सख्त रुख

6 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा, "जल ही जीवन है और बिना जल के पृथ्वी पर किसी भी प्राणी का कोई अस्तित्व नहीं है। इसलिए जल को किसी भी कीमत पर बचाना होगा।" न्यायालय ने कहा कि जलाशयों पर किसी भी तरह के अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती है और इसे भारी जुर्माने एवं दंड के साथ तुरंत हटाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कोर्ट के निर्देश

  • पूरे प्रदेश में सरकारी/जनोपयोगी भूमि पर अतिक्रमण 90 दिनों के भीतर हटाया जाए।
  • ग्राम सभा की जमीन (जो सौंपी गई संपत्ति है) पर अतिक्रमण की सूचना न देने या उसे अनुमति देने वाले प्रधानों, लेखपालों और भूमि प्रबंधन समिति के सदस्यों के खिलाफ बीएनएस के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जाए।
  • पुलिस अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया गया है।
  • अतिक्रमण की सूचना देने वाले व्यक्ति को हर चरण पर सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
  • यदि अतिक्रमण बना रहता है या आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट में आपराधिक अवमानना का मुकदमा शुरू किया जा सकता है।

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