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तृणमूल ने गवर्नर धनखड़ पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 01, 2020 10:58 pm IST,  Updated : Dec 01, 2020 10:58 pm IST

तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से तत्काल हटाने की मांग की है।

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तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से तत्काल हटाने की मांग की है। Image Source : PTI FILE

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से तत्काल हटाने की मांग की है। दस्तीदार ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल धनखड़ राज्य में शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी मुख्यालय में दस्तीदार ने कहा कि धनखड़ एक 'बीजेपी नेता' की तरह व्यवहार कर रहे हैं। 3 बार की लोकसभा सदस्य दस्तीदार ने कहा, ‘राज्यपाल परिवार के मुखिया की तरह होते हैं। वह सबको साथ लेकर चलने के बजाय राज्य की शांति और स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वह बीजेपी नेता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। हमें लगता है कि राज्य की बेहतरी के लिए उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।’

‘केंद्र पर बंगाल का 85 हजार करोड़ रुपये बकाया’

दस्तीदार ने पीएम-केयर्स फंड को लेकर केंद्र पर भी हमला करते हुए आरोप लगाया कि इसमें पैसे को लेकर अनियमितताएं हैं। उन्होंने कहा, ‘केंद्र संविधान द्वारा दी गई शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है। वे राज्यों की बकाया महत्वपूर्ण राशि रोक रहे हैं। केंद्र पर बंगाल का 85,000 करोड़ रुपये बकाया है।’ दलितों पर अत्याचार को लेकर दस्तीदार ने बीजेपी पर प्रहार किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हाथरस की घटना के संदर्भ में कहा, ‘हर चुनाव से पहले, हम बीजेपी नेताओं को पांच सितारा होटलों का खाना दलितों के साथ खाते हुए फोटो खिंचवाते देखते हैं। चुनाव के बाद दलित महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, बलात्कार किया जाता है, उनके शव को जलाया जाता है। यह बीजेपी की सच्चाई है।’

ममता सरकार से सवाल-जवाब करते रहते हैं धनखड़
बता दें कि धनखड़ अक्सर राज्य की कानून-व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल-जवाब करते रहे हैं। बीते महीने धनखड़ ने उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के काफिले में पथराव के बाद उसमें शामिल कारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद कहा था कि राज्य में राजनीतिक हिंसा के नियंत्रण का कोई संकेत नहीं है। इससे पहले भी आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में पुलिस और नौकरशाही का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने लोकसेवकों को राजनीतिक पदाधिकारियों की तरह काम नहीं करने के लिए कहा था।

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