नई दिल्ली: भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की तर्ज पर अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के साथ समझौते पर विचार करने की खबरों पर चिंता जताई और इस प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए पाकिस्तान के परमाणु प्रसार रिकार्ड का हवाला दिया।
अच्छे रिकार्ड की वजह से हुआ था भारत के साथ समझौता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने पाकिस्तान और उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम के परोक्ष संदर्भ में कहा, हमने ये खबरें देखी हैं और यह पहली बार नहीं है जब यह विषय उठा है। जो भी इस खास डोजियर की जांच कर रहा है उसे प्रसार के क्षेत्र में पाकिस्तान के पिछले रिकार्ड के बारे में जानकारी होनी चाहिए। और जब भारत के साथ इस तरह का समझौता हुआ तो यह हमारे अपने अप्रसार के पिछले साफ रिकार्ड के आधार पर हुआ।
पाकिस्तान का रिकार्ड भी देखा जाना चाहिए
उन्होंने कहा, यही कारण है कि अमेरिका ने वर्ष 2005 में हमारे साथ 123 समझौते किये और इसलिए हमें वर्ष 2008 में एनएसजी की छूट मिली। पाकिस्तान का पिछला रिकार्ड पूरी तरह से अलग है। इसलिए हमें आशा है कि इस तरह के कोई फैसला करने से पहले इस पिछले रिकार्ड पर विचार किया जाएगा।
अमेरिकी मीडिया में उछली थी अमेरिका-पाक समझौते की बात
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की इस महीने अमेरिका की यात्रा से पहले द वाशिंगटन पोस्ट में एक खबर में कहा गया कि अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और डिलीवरी प्रणालियों पर नई सीमाओं पर समझौते पर बात कर रहा है। यह समझौता भारत पाक असैन्य परमाणु समझौते जैसा हो सकता है।
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