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चीन ने अमेरिकी राजदूत से कहा, तिब्बत दौरे के दौरान ‘निष्पक्ष फैसला’ करें

Reported by: Bhasha Published : May 20, 2019 05:16 pm IST, Updated : May 20, 2019 05:16 pm IST

अमेरिकी राजदूत टेरी ब्रांस्टेड का यह दौरा दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते ‍व्यापार युद्ध के बीच हो रहा है। अमेरिका द्वारा इस साल के शुरू में रेसीप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट, 2018 पारित किये जाने के बाद चीन की तरफ से अमेरिकी राजदूत के दौरे की इजाजत दी गई है।

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अमेरिकी राजदूत टेरी ब्रांस्टेड 19 से 25 मई के बीच तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के सीमावर्ती क्विन्हाई प्रांत के दौरे पर

बीजिंग। अमेरिकी राजदूत टेरी ब्रांस्टेड को तिब्बत दौरा करने की अनुमति देने वाले चीन ने सोमवार को उम्मीद जताई कि अमेरिकी राजदूत हिमालयी क्षेत्र की स्थिति खासकर धर्म और तिब्बती संस्कृति को लेकर ‘‘निष्पक्ष फैसला’’ करेंगे। ब्रांस्टेड 19 से 25 मई के बीच तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के सीमावर्ती क्विन्हाई प्रांत के दौरे पर हैं और यह चार सालों में बेहद प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी अमेरिकी राजदूत का पहला दौरा है।इस दौरे के दौरान ब्रांस्टेड की स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात और धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत स्थलों का दौरा करने का कार्यक्रम है।

उनका यह दौरा दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते ‍व्यापार युद्ध के बीच हो रहा है। अमेरिका द्वारा इस साल के शुरू में रेसीप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट, 2018 पारित किये जाने के बाद चीन की तरफ से अमेरिकी राजदूत के दौरे की इजाजत दी गई है। अमेरिका ने इस एक्ट के जरिये चेतावनी दी थी कि अगर चीन ने अमेरिकी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों को तिब्बत जाने से रोका तो वह भी समान और पारस्परिक उपाय अपनाएगा। तिब्बत, निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा की मातृभूमि है।

नया कानून उन चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाएगा जो अमेरिकी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों को तिब्बत जाने से रोकेंगे। अभी विदेशी पर्यटकों को तिब्बत का दौरा करने के लिये चीनी वीजा के अलावा विशेष यात्रा परमिट की भी आवश्यकता होती है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कंग ने सोमवार को मीडिया से कहा कि “हम राजदूत ब्रांस्टेड के दौरे का स्वागत करते हैं जिससे वह शांतिपूर्ण आजादी के बाद बीते साठ सालों में हुए बदलावों को देख सकें।”

अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा था कि यह यात्रा राजदूत के लिए तिब्बती संस्कृति एवं भाषा के संरक्षण तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों को लेकर लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंताओं के बारे में स्थानीय नेताओं से बातचीत करने का एक अवसर है, इस पर टिप्पणी करते हुए लू ने कहा कि चीन को उम्मीद है कि राजदूत तिब्बत की मौजूदा स्थिति के बारे में निष्पक्ष फैसला करेंगे।

लू ने कहा, ‘‘जहां तक अमेरिकी दूतावास की टिप्पणी की बात है, हमें उम्मीद है कि यह दौरा उन्हें निष्पक्ष फैसला लेने में मदद कर सकता है जो तथ्यों पर आधारित हो, खासकर धर्म, संस्कृति, विरासत और इतिहास पर। हमें उम्मीद है कि वह अफवाहों से भ्रमित होने के बजाए वह अपना फैसला खुद कर सकते हैं।’’

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