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अमेरिका के पाले से कनाडा को छीनने की कोशिश, मौका देखकर यूं चौका मारना चाहता है चीन

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में खटास का फायदा उठाते हुए चीन उसे अपने पाले में करने के लिए जोर लगा रहा है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बीजिंग यात्रा को चीन रणनीतिक अवसर मानते हुए अपने प्लान को अमली जामा पहनाने की कोशिश में है।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Jan 14, 2026 10:01 am IST, Updated : Jan 14, 2026 10:01 am IST
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Image Source : AP FILE कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग।

बीजिंग: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी बुधवार को चीन की यात्रा पर बीजिंग पहुंचे हैं। खास बात यह है कि ये पिछले कई सालों में कनाडा के किसी प्रधानमंत्री का चीन का पहला बड़ा आधिकारिक दौरा है। चीन इस मौके को देखते हुए कनाडा को अमेरिका के प्रभाव से दूर करने की कोशिश कर रहा है। चीन की सरकारी मीडिया ने कनाडा से कहा है कि वह अपनी विदेश नीति में 'रणनीतिक स्वायत्तता' अपनाए, यानी अमेरिका के पीछे-पीछे न चले। माना जा रहा है कि इस दौरे पर चीन पूरी कोशिश करेगा कि कनाडा को अमेरिका से थोड़ा दूर और अपने थोड़ा करीब लाया जा सके।

'...तो बीजिंग के साथ नहीं सुधरेंगे कनाडा के रिश्ते'

चाइना डेली अखबार ने एक संपादकीय में लिखा है, 'अगर कनाडा पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्तों में आई खराबी की वजहों पर विचार करे, यानी पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सरकार की अमेरिका के साथ मिलकर चीन को रोकने की नीतियों पर, तो वह समझ जाएगा कि चीन से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्वतंत्रता बनाए रखकर वह ऐसी स्थिति से बच सकता है। अगर ओटावा (कनाडा की राजधानी) भविष्य में फिर से अपनी चीन नीति को वॉशिंगटन की इच्छा के अधीन रखेगा, तो बीजिंग के साथ रिश्ते सुधारने के उसके पिछले प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे।'

अमेरिका-कनाडा के रिश्तों में आई है खटास

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा, 'शायद अमेरिका के साथ मिलकर चीन पर ऊंचे टैरिफ लगाने की भारी कीमत चुकाने से ओटावा में रणनीतिक स्वायत्तता की समझ जागी है।' बता दें कि कनाडा लंबे समय से अमेरिका का बहुत करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर उसके एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगा दिए हैं और यहां तक कहा है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। ट्रंप की आर्थिक नीतियां और अन्य देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से कनाडा-अमेरिका के पुराने रिश्ते कमजोर हो सकते हैं।

पिछले कुछ सालों में खराब हुए कनाडा-चीन के रिश्ते

मार्क कार्नी, जो पिछले साल प्रधानमंत्री बने, इस दौरे को व्यापार पर केंद्रित बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह दुनिया भर में नए साझेदार बनाने का हिस्सा है ताकि कनाडा की अर्थव्यवस्था अमेरिकी बाजार पर निर्भर न रहे। कनाडा अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है। पिछले कुछ सालों में कनाडा-चीन रिश्ते खराब रहे थे। 2018 में अमेरिका के कहने पर चीन की एक टेक कंपनी की अधिकारी को कनाडा में गिरफ्तार किया गया था, जिससे तनाव काफी बढ़ गया था।

चीन के साथ रिश्ते बेहतर बनाना चाहते हैं कार्नी

2024 में ट्रूडो सरकार ने बाइडेन के नेतृत्व में चीन से बने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैरिफ और स्टील एवं एल्यूमिनियम पर 25% टैरिफ लगा दिया था। चीन ने जवाब में कनाडा के कैनोला, समुद्री भोजन और पोर्क के निर्यात पर टैरिफ लगा दिए। कनाडा के अधिकारी कहते हैं कि इस दौरे से व्यापार में कुछ प्रगति होगी, लेकिन टैरिफ पूरी तरह हटने की उम्मीद नहीं है। कार्नी इस रिश्ते को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो ट्रूडो के समय में काफी खराब हो गया था। कार्नी का यह दौरा 14 से 17 जनवरी तक चलेगा, जिसमें वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य नेताओं से मिलेंगे। दोनों देश इसमें व्यापार, ऊर्जा, कृषि और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बात करेंगे।

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