Purnia Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। इसके मद्देनजर सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। मौजूदा नीतीश कुमार की सरकार ने भी मतदाताओं को साधने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की है। इस बार के चुनावी रण में आम आदमी पार्टी (AAP) के अलावा जन सुराज जैसे नए दल भी ताल ठोक रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से एक अहम सीट पूर्णिया भी है, जहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होगी।
क्या रहे पिछले चुनाव के नतीजे?
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विजय कुमार खेमका ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस की उम्मीदवार इंदु सिन्हा को 32,154 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। विजय कुमार खेमका को 92,020 वोट, जबकि कांग्रेस को 59,205 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी राम चरित्र यादव रहे थे, जिन्हें 7,614 वोट मिले थे।
पिछले चुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में थे
- विजय कुमार खेमका- BJP
- इंदु सिन्हा- कांग्रेस
- विजय उरांव- SDPI
- संजय सिंह- अखिल भारतीय विकास किसान मजदूर पार्टी (AKP)
- नीरज कुमार सिन्हा- निर्दलीय
- बिद्यानंद मेहता- राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP)
- अशोक कुमार सिंह- निर्दलीय
- नित्यानंद चौधरी- निर्दलीय
- अजय स्वर्ण- निर्दलीय
- मोहम्मद असलम आज़ाद- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)
- शेख अकबर अली- जनता दल सेक्युलर (JDS)
- श्याम मोहन झा उर्फ एस.एम. झा- निर्दलीय
- अनिशा प्रीति- परिवर्तनकारी पीपल पार्टी (TPLRSP)
- विनोद सिंह- आम जनता पार्टी राष्ट्रीय (AJPR)
- चंद्र भानु कुमार- निर्दलीय
- राजेश कुमार निराला- निर्दलीय
- मनोज ठाकुर- भारतीय लोक रिपब्लिकन पार्टी (BLRP)
- रवींद्र कुमार सिंह- जनवादी विकास किसान पार्टी (JVKP)
- प्रदीप कुमार- अखिल भारतीय गरीब सेना पार्टी (AGSP)
- सुमित सिंह- निर्दलीय
- अब्दुल सुभान- भारतीय जन जन विकास दल (BJJND)
- राजेश कुमार ठाकुर- निर्दलीय
- मिहिर आनंद- जनता पार्टी (JP)
पूर्णिया विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
बिहार की पूर्णिया विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जिसमें कांग्रेस के कमल देव नारायण सिन्हा विजयी रहे थे। कमल देव नारायण सिन्हा ने 1952 से लेकर 1972 तक लगातार छह बार इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के देव नाथ राय ने कांग्रेस की जीत की परंपरा को तोड़ा।
1980 से लेकर 1995 तक इस सीट पर सीपीआईएम (CPM) के नेता अजीत सरकार का दबदबा रहा। वह लगातार चार बार चुनाव जीते। 1998 में अजीत सरकार की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी माधवी सरकार सीपीआईएम के टिकट पर विधायक बनीं।
2000 के चुनाव से यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गढ़ बन गई। राज किशोर केशरी ने 2000 से लेकर 2010 तक लगातार चार बार बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। जनवरी 2011 में राज किशोर केशरी की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी किरण केशरी बीजेपी के टिकट पर विजयी हुईं। 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के विजय कुमार खेमका ने जीत हासिल की। 2020 में विजय कुमार खेमका ने कांग्रेस की इंदु सिन्हा को 32,154 वोटों के अंतर से हराया था।