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चीनी ऐप से लिया पर्सनल लोन तो हो जाएंगे तबाह, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिया ये निर्देश

 Published : Oct 30, 2022 06:58 pm IST,  Updated : Oct 30, 2022 06:58 pm IST

Action Against Chinese App:अगर आपने भी चीन के ऐप से लोन लेने के लिए अप्लाई किया है या ऐसे किसी एप से ऋण लेने की सोच रहे हैं तो बेहतर है कि सावधान हो जाइये, अन्यथा आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। चीनी ऐप के जरिये लोन ने देने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस मामले में राज्यों को

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रुपया Image Source : PTI

Action Against Chinese App:अगर आपने भी चीन के ऐप से लोन लेने के लिए अप्लाई किया है या ऐसे किसी एप से ऋण लेने की सोच रहे हैं तो बेहतर है कि सावधान हो जाइये, अन्यथा आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। चीनी ऐप के जरिये लोन ने देने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस मामले में राज्यों को भी कई तरह के सख्त निर्देश जारी किए हैं। साथ ही आमजनों को भी चीनी ऐप से कोई भी लोन नहीं लेने के प्रति अगाह किया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कर्ज देने वाले मोबाइल ऐप के खिलाफ कानून प्रतर्वन एजेंसियों को सख्त कार्रवाई करने को कहा है क्योंकि चीन के नियंत्रण वाली इन कंपनियों के उत्पीड़न और पैसा वसूल करने के सख्त तरीकों की वजह से आत्महत्या की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि इस मुद्दे का राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा गंभीर असर हो रहा है। इसमें कहा गया कि देशभर से बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि डिजिटल तरीके से कर्ज देने वाली गैरकानूनी ऐप विशेषकर कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को ऊंची ब्याज दरों पर कम अवधि के कर्ज या सूक्ष्म कर्ज देती हैं और इसमें छिपे शुल्क भी होते हैं। ये कंपनियां कर्जदारों के संपर्क, स्थान, तस्वीरों और वीडियो जैसे गोपनीय निजी डेटा का इस्तेमाल कर उनका उत्पीड़न करती हैं और उन्हें भयाक्रांत कर उनका दोहन (ब्लैकमेल) भी करती हैं।

 मंत्रालय ने कहा, ‘‘कर्ज देने वाली इन गैरकानूनी कंपनियों के खराब रवैये के कारण देशभर में कई लोगों की जान चली गई है। इस मुद्दे का राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।’’ कर्ज लेने वालों को इन ऐप को अपने संपर्क, स्थान और फोन की स्टोरेज तक अनिवार्य रूप से पहुंच देनी पड़ती है। मंत्रालय ने कहा कि इसी डेटा का दुरुपयोग किया जाता है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, जांच में यह पाया गया है कि यह एक संगठित साइबर अपराध है जिसे अस्थायी ईमेल, वर्चुअल नंबर, अनजाने लोगों के खातों, मुखौटा कंपनियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, एपीआई सेवाओं, क्लाउड होस्टिंग और क्रिप्टोकरंसी के जरिये अंजाम दिया जाता है।

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