Missing Children In Delhi: दिल्ली में नए साल 2026 के जनवरी महीने के 15 दिनों में 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने से हर नागरिक हैरान है। दिल्ली में लापता मामलों का यह सिलसिला नया नहीं है। बीते वर्षों के जिपनेट यानी Zonal Integrated Police Network जैसे पुलिस डेटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से 2025 तक हजारों लोग लापता दर्ज हुए हैं और उनमें से कई का आज भी पता नहीं चला है। INDIA TV की टीम दिल्ली के बुराड़ी में पहुंची, जहां ऐसे 2 अलग-अलग परिवारों से मिले जिनके बेटे दिसंबर महीने से लापता हैं। लापता 19 साल के वसीम रजा के पिता की आंखों में आंसू हैं तो 16 साल के लापता ऋतिक झा की मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
केस स्टडी 1: कैसे गायब हो गया वसीम रजा?
बिहार के किशनगंज के रहने वाले तेमुल हक और रूबी दिल्ली के बुराड़ी के मौर्य एनक्लेव में रहते हैं। तेमुल हक और रूबी के तीन बच्चे हैं। उनमें सबसे बड़ा था वसीम रजा। तेमुल हक बताते हैं कि 27 दिसंबर की रात वसीम घर पर सोया था लेकिन 28 की सुबह 9 बजे देखा तो वसीम घर में नहीं था। खूब तलाश किया लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं है। वसीम को सिंगिंग का शौक था लेकिन घर वाले AC का काम करने की बात कहते हैं।
वसीम के पिता चिंतित हैं कि उनके बेटे के साथ कुछ अनहोनी तो नही हो गई। सोते-सोते जब याद आता है तो उठकर बैठ जाते हैं। इतने पुलिस वाले सब दिल्ली में हैं तो काम क्यों नहीं करते हैं। वोट मांगने आते हैं तो सब छान मार देते हैं और जब बच्चा गायब होता है तो सुनवाई नहीं होती। वसीम के पिता कहते हैं कि दिल्ली में 15 दिनों में 800 लोग गायब हो जाते हैं तो हो क्या रहा है दिल्ली के अंदर, इस तरह से तो दिल्ली खाली हो जाएगी और दिल्ली वालों को डर लगने लगेगा।
केस स्टडी 2: कहां और क्यों चला गया ऋतिक झा?
बुराड़ी के संत नगर के रहने वाला 16 साल का ऋतिक झा JEE मेंस की तैयारी कर रहा था। 17 दिसंबर को ऋतिक की मां ने पढ़ाई के लिए उसे डांट दिया था। ऋतिक घर से नाराज होकर निकला था जो अभी तक नहीं लौटा। ऋतिक की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। ऋतिक की मां बेबी झा ने बताया कि आखिरी लोकेशन नेता जी सुभाष पैलेस NSP मेट्रो पर दिखाई दी। उसके आगे की CCTV फुटेज इसलिए नहीं मिली क्योंकि 7 दिन लेटर लिखने में पुलिस को लग गए और आगे की फुटेज डिलीट हो गई।
ऋतिक झा की मां बोलीं कि पुलिस कहती है कि हम एक्शन ले रहे हैं। मैं बस यही मांग करूंगी कि मेरा बेटा ला दीजिए। गायब हुए बच्चों में मेरा भी एक बेटा है। मुझे लगता है कि मेरे बेटे को किसी ने किडनैप कर लिया है।
पिछले 27 दिनों में ट्रेस किए गए 235 लोग
साल 2026 के पहले 27 दिनों में 807 लोग गुमशुदा हो गए, इनमें से 235 लोग ट्रेस किए गए हैं जबकि 538 अब तक लापता हैं। लापता लोगों में 137 बच्चे शामिल हैं। इन 137 बच्चों में 120 लड़कियां शामिल हैं। यानी नए साल के पहले दिन 27 लोग हर दिन गायब हो जा रहे हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, हर दिन करीब 9 लोगों को ट्रेस भी किया गया है। इन लापता लोगों में सबसे ज्यादा महिलाएं और लड़कियां गायब हुई हैं।
गायब हुए नाबालिगों में किशोरियों का अनुपात ज्यादा
दिल्ली पुलिस में दर्ज रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि नाबालिगों में किशोरियों (12-18 वर्ष) का अनुपात बहुत अधिक होता जा रहा है, जिससे यह समस्या और गंभीर कि ये केवल रोजमर्रा के खो जाने के मामले नहीं, कुछ मामलों में अपहरण या अन्य अपराधी गतिविधियों का भी खतरा हो सकता है।
दिल्ली में रोजाना गायब हो रहे 27 लोग
देश की राजधानी में रोजाना 27 से ऊपर लोगों का लापता होना न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि ये सोचने के लिए मजबूर करता है कि आखिर ये लोग ऐसे कहां गायब हो जाते हैं जिन्हें पुलिस नहीं ढूंढ पाती। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के शुरुआती 27 दिनों में 807 लोग लापता दर्ज किए गए, जिनमें से 235 लोगों को ट्रेस कर लिया गया, जबकि 572 अब भी अनट्रेस्ड हैं। वयस्कों के मामलों में 616 लोग लापता हुए, जिनमें 181 का पता चला (90 पुरुष और 91 महिलाएं), जबकि 435 वयस्क अभी भी लापता हैं। वहीं, नाबालिगों के 191 मामले सामने आए, जिनमें से 48 बच्चों को ट्रेस किया गया (29 लड़कियां और 19 लड़के), जबकि 137 नाबालिग अब तक नहीं मिले।
साल बदलते रहे लेकिन नहीं बदला तो आंकड़ा
लेकिन पिछले 11 साल की अगर हम बात करें तो आंकड़े डराने वाले हैं। राजधानी दिल्ली से पिछले 11 साल में 5559 बच्चे गायब हुए है, जिनमें से 695 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। दिल्ली पुलिस के डेटा के मुताबिक, 2026 के पहले 27 दिनों में 8 साल की उम्र के कुल 9 बच्चे गायब हुए जिनमें 6 लड़के थे। इनमें से 3 लड़कों को अब तक ट्रेस किया जा चुका है जबकि बाकी 6 की तलाश जारी है। साल 2025 में 8 साल तक के कुल 368 बच्चे लापता हुए थे जिनमें से 149 ट्रेस कर लिए गए जबकि 219 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। साल बदलते जाते हैं लेकिन आंकड़े कमोबेश यही रहते हैं। सवाल ये है कि जिन बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलता उनके साथ क्या हुआ, इसका जवाब किसी के पास नहीं।
18 साल से कम उम्र वाले 137 बच्चे अभी भी लापता
अगर हम बात 8 से 12 साल के बच्चों की करें तो 2026 के पहले 27 दिनों में कुल 13 बच्चे लापता हुए जिनमेम से सिर्फ तीन को ट्रेस किया जा सका जबकि 10 बच्चों का सुराग नहीं मिला है। जबकि 12 से 18 साल के कुल 169 बच्चे शुरुआती 27 दिन में लापता हो गए जिनमें से 48 ट्रेस कर लिए गए जबकि 121 अभी भी लापता हैं। यानी शुरू के 27 दिन में 0 से 18 साल के कुल 137 बच्चे अभी भी लापता हैं।
पिछले 10 साल में 60,694 बच्चे लापता हुए
साल 2025 में 0 से 18 साल के 5915 बच्चे गायब हुए थे जिनमें से 4424 को ट्रेस किया गया था और 1491 लापता हैं। 2016 से 2026 के बीच 60,694 बच्चे लापता हुए, जिनकी उम्र 18 साल तक कि थी, इनमें से 53,763 ट्रेस कर लिए गए जबकि 6931 का कोई सुराग नहीं मिला। यानी गायब होने वाले बच्चों में से 11 प्रतिशत बच्चे अनट्रेस रह जाते हैं।
AAP विधायक ने जताई चिंता?
गुमशुदा हो रहे लोगों पर AAP नेता और बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि सैंकड़ों लोगों के गायब होने की सूचना मिली हैं जिससे लोगों में भय का वातावरण है। बुराड़ी से भी दर्जनों सूचनाएं हमारे पास आईं जिसमें ज्यादातर बच्चे हैं। दिल्ली देश की राजधानी है, जहां गृहमंत्री बैठते हैं। मुख्यमंत्री कहती थीं कि क्राइम खत्म हो जाएगा लेकिन यह अचानक क्राइम बढ़ क्यों रहा है। मैं गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री से उम्मीद करता हूं कि पुलिस कमिश्नर को बुलाएं और इस मामले का संज्ञान लें कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
दिल्ली पुलिस बोली डरने की बात नहीं
इसको लेकर दिल्ली पुलिस के पीआरओ संजय त्यागी ने कहा कि दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है। पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई वृद्धि नहीं हुई है। बल्कि जनवरी 2026 माह में, पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
बच्चों के मामलों को देते हैं विशेष प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि यह भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस में अपराधों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है। लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है। निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरंत पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
इस संबंध में सभी जिलों में Dedicated Missing Persons Squads और क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है।
हम आपसे यह अपील करते हैं कि इस संबंध में फैल रही किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दिया जाए। इसके अलावा, अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध उचित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि लापता व्यक्तियों से संबंधित सभी मामलों का Registration और तुरंत जांच की जाए। सभी संभव प्रयास करके लापता व्यक्तियों को जल्द से जल्द उनके परिजनों से मिलाया जाए। दिल्ली पुलिस आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।
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