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दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में कितनी गाड़ियों को पहुंचा नुकसान? सामने आया आंकड़ा

दिल्ली ब्लास्ट में जिन वाहनों को नुकसान पहुंचा, उनका आंकड़ा सामने आया है। गौरतलब है कि दिल्ली में 10 नवंबर को शाम के 7 बजे के करीब जोरदार धमाका हुआ था।

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Rituraj Tripathi Published : Nov 12, 2025 01:45 pm IST, Updated : Nov 12, 2025 01:45 pm IST
Delhi Blast- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में गाड़ियों को पहुंचा नुकसान

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मामले में काफी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है, जिसका आंकड़ा सामने आ गया है। 

कितने वाहनों को पहुंचा नुकसान?

लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में 8 गाड़ियां पूरी तरह से डैमेज हैं। इसके अलावा 22 और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है, जिसमें ई रिक्शा, ऑटो, टैक्सी और बस शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, विस्फोटक आई-20 कार के पीछे वाली सीट पर रखा हुआ था।

शक है कि उमर मोहम्मद लाल किले की पार्किंग में इसलिए गया क्योंकि पहले वो वहां ब्लास्ट करने की फिराक में था लेकिन सोमवार होने के चलते लाल किला बंद था इसलिए वहां भीड़ नहीं थी। इसलिए वह पार्किंग से निकला। सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से उसके साथी पकड़े गए ,पूरा विस्फोटक पकड़ा गया, इसके चलते हुए वो काफी पैनिक में था। उसे गिरफ्तारी का डर था, इसी पैनिक स्टेज में गाड़ी के अंदर धमाका किया गया।

उमर ने की थी टर्की की यात्रा 

 

खबर ये भी सामने आई है कि उमर मोहम्मद और मुजम्मिल शकील ने टर्की की यात्रा की थी। वहां जैश ए मोहम्मद के हैंडलर से मिला था। पासपोर्ट में टर्की के स्टैंप मिले है।

एक और बड़ा खुलासा

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर की शाम हुए धमाके की जांच में हुआ बड़ा खुलासा ये भी हुआ कि इनके निशाने पर लाल किला, इंडिया गेट, कांस्टीट्यूशन क्लब, गौरी शंकर मंदिर, प्रमुख रेलवे स्टेशन और शॉपिंग मॉल्स थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह साजिश जनवरी 2025 से चली आ रही थी। यह आतंकी मॉड्यूल कई महीनों से मुंबई के 26/11 जैसे बड़े हमलों की प्लानिंग कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, मॉड्यूल ने करीब 200 से अधिक शक्तिशाली IED तैयार करने की योजना बनाई थी, जिन्हें एक साथ दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के हाई-प्रोफाइल निशानों पर उपयोग किया जाना था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश की गई थी

पुलिस का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग के कुछ रैडिकलाइज्ड डॉक्टरों ने ‘व्हाइट-कॉलर’ कवर का फायदा उठाते हुए फरीदाबाद में अपना बेस बनाया। डॉक्टर होने की वजह से उन पर लोगों को शक कम होता था और वे NCR में आसानी से आ-जा पाते थे। विस्फोटक छिपाने और जमा करने के लिए आरोपियों ने धौज और फतेहपुर तागा इलाके में ऐसे कमरे किराए पर लिए जहां बिना शक-संदेह आवाजाही हो सकती थी। 

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