Friday, January 16, 2026
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गर्भधारण की क्षमता खो चुकी महिला को 20 लाख रुपये का भुगतान करेगा लापरवाह नर्सिंग होम, जानिए पूरा मामला

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नर्सिंग होम की तरफ से ऐसी दवाइयां दी गईं, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई। जांच करने के बाद जब रिपोर्ट सामने आई तो भ्रूण मृत पाया गया। इसके बाद वह कभी गर्भधारण नहीं कर सकी।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Jan 16, 2026 10:54 pm IST, Updated : Jan 16, 2026 10:58 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सांकेतिक तस्वीर

दिल्ली के एक नर्सिंग होम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। उपभोक्ता आयोग ने नर्सिंग होम को उसकी चिकित्सक की लापरवाही के कारण एक महिला के गर्भधारण की क्षमता स्थायी रूप से खो देने के लिए परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही आयोग ने मुकदमा का खर्च सहित मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। 

 ‘फैलोपियन ट्यूब’ को निकालना पड़ा

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉक्टर रश्मि बंसल ने समरीन द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई की। समरीन ने आरोप लगाया था कि दरियागंज के एक नर्सिंग होम में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कुलजीत कौर गिल द्वारा इलाज में लापरवाही किए जाने के कारण उनकी ‘फैलोपियन ट्यूब’ को निकालना पड़ा। 

बिना किसी जांच के दवाएं और इंजेक्शन लिखे

शिकायतकर्ता ने बताया कि घर पर किए गए ‘यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट’ (गर्भावस्था जांच) में उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई और वह 24 जुलाई 2020 को दरियागंज स्थित फैमिली हेल्थ केयर सेंटर गई, जहां चिकित्सक ने केवल घर पर किए गए परीक्षण के आधार पर ही गर्भावस्था की कथित तौर पर पुष्टि की तथा बिना किसी स्वतंत्र जांच या परीक्षण के ही दवाएं और इंजेक्शन लिख दिए।

एसिडिटी जैसी दवाइयां दी गईं

समरीन ने आरोप लगाया कि 11 अगस्त, 15 अगस्त, 26 अगस्त और दो सितंबर 2020 को कई बार पेट दर्द तथा लगातार रक्तस्राव की शिकायत करने के बावजूद, उन्हें कोई अल्ट्रासाउंड या उचित परीक्षण कराने की सलाह नहीं दी गई और बार-बार केवल ‘एसिडिटी’ जैसी दवाइयां ही दी गईं। उनकी हालत बिगड़ गई और 7 सितंबर 2020 को एक अन्य चिकित्सक ने तत्काल जांच कराने की सलाह दी। 

आपातकालीन की गई सर्जरी

जांच करने के बाद प्रयोगशाला रिपोर्ट में भ्रूण मृत पाया गया। इसके बाद, उन्हें तुरंत कस्तूरबा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी आपातकालीन सर्जरी हुई, जिसमें ‘फैलोपियन ट्यूब’ निकाल दी गई और चिकित्सकों ने कहा कि वह दोबारा गर्भधारण नहीं कर पाएगी। 

6 महीने के अंदर मुआवजा देने का निर्देश

आयोग ने 18 दिसंबर के आदेश में कहा, ‘यह अपूरणीय क्षति है और महिला को गर्भधारण की क्षमता से वंचित होना पड़ा। 20 लाख रुपये की राशि उचित, आनुपातिक, कानूनी रूप से न्यायसंगत है।’ आयोग ने फैमिली हेल्थ केयर सेंटर को समरीन को 6 सप्ताह के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया, साथ ही नर्सिंग होम को कानून के अनुसार डॉक्टर गिल से राशि वसूलने की स्वतंत्रता भी दी। 

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