सोशल मीडिया पर हजारों की संख्या में वीडियो आते रहते हैं, इनमें से कुछ वीडियो समाज में भ्रामक जानकारी परोसने का काम करते हैं। आम आदमी इन वीडियो की सच को पकड़ नहीं पाते, ऐसे में वे फर्जी खबरों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे ही एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि हाल में पश्चिम बंगाल में एक विशेष समुदाय के लोगों ने पुलिस को दौड़ा लिया, जबकि इंडिया टीवी के फैक्ट चेक में यह दावा भ्रामक पाया गया।
सोशल मीडिया के फेसबुक पेज पर एक वीडियो वायरल की गई, जिसमें दावा किया गया कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुलिस को उल्टे दौड़ा लिया। इस कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाना चाहिए। वीडियो sneekmedia नाम के फेसबुक पेज पर शेयर की गई।
वीडियो में कैप्शन भी लिखा गया,"पश्चिम बंगाल से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और राज्य पुलिस कर्मियों को स्थानीय लोगों के एक समूह द्वारा पीछा करते हुए दिखाया गया है, जिन्हें मुस्लिम समुदाय के सदस्य के रूप में पहचाना गया है। स्थिति तनावपूर्ण दिखाई दे रही है, सोशल मीडिया पर अराजकता के दृश्य तेजी से फैल रहे हैं। इस बीच, हिंदू निवासियों को कथित तौर पर अपने स्थानीय रक्षा समूह बनाते और जवाबी कार्रवाई की तैयारी करते देखा गया, जो समुदाय-आधारित तनाव में चिंताजनक वृद्धि का संकेत देता है। कथित तौर पर चल रही सांप्रदायिक अशांति से जुड़ी इस घटना ने राज्य में कानून और व्यवस्था पर बहस को फिर से हवा दे दी है। पश्चिम बंगाल हिंदुत्व राजनीतिक आंदोलनों के लिए एक प्रमुख क्षेत्र है, इसलिए अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या शांति और शासन बहाल करने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू करना आवश्यक है।" इसी से जुड़ी वीडियो यहां भी देख सकते हैं।
जब हमने गूगल लेंस पर इस वीडियो का एक स्क्रीनग्रैब लेकर सर्च किया तो सच्चाई सामने आ गई। हमें गूगल में कई मीडिया रिपोर्ट मिली, जिनमें दावा किया गया कि यह वीडियो का काफी पुराना है। हमें मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट मिली जिसमें कहा गया कि साल 2020 में कोरोना के दौरान एक लोकल बाजार में लोगों की भीड़ लगी हुई थी, चूंकि कोरोना में लोगों के एक साथ जमा होने पर पाबंदी थी, इसलिए पुलिस की टीम वहां गई और लोगों को घर जाने के कहा। हालांकि इसके बाद भीड़ ने पुलिस का विरोध किया और पुलिस बल को दौड़ा लिया। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों पर इसे लेकर केस किया था।
हमें मामले का एक वीडियो भी मिला जो न्यूज एजेंसी एएनआई का है। साथ ही पुलिस का भी एक ट्वीट मिला जिसमें पुलिस ने कार्रवाई करने की बात कही थी।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा वीडियो काफी पुराना है, जो जानबूझकर लोगों में भ्रम पैदा करने के लिए डाला गया। है। अत: यह वीडियो भ्रामक है।
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