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वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में करीब 5 प्रतिशत लोगों की मौत सांस की बीमारी से: रिपोर्ट

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।

India TV Health Desk India TV Health Desk
Published on: November 12, 2021 14:36 IST
Air pollution kills about 5 percent people in Delhi due to respiratory disease says Report- India TV Hindi
Image Source : PTI Air pollution kills about 5 percent people in Delhi due to respiratory disease says Report

राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। वहीं कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में  5.6 प्रतिशत लोगों की मौद सांस की बीमारी के कारण हो रही हैं। 

प्रजा फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के के मुताबिक दिल्ली में पिछले साल करीब 1,42,789 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से 39 प्रतिशत की मौत घर पर ही हुई। इन मौतों में से 5.6 प्रतिशत ऐसे लोग थे, जिनकी मौत सांस की बीमारी के  कारण हुई थी, जिसका मुख्य कारण वायु प्रदूषण था।

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प्रजा फाउंडेशन ने दिल्ली के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। जिसमें कहा गया है कि दिल्ली के जो हालात है उसके अनुसार यहां जितनी आबादी है उसके अनुसार न तो अस्पताल है और न ही दवा खाना। अस्पतालों को चलाने वाली एजेंसियों को हर साल हेल्थ बजट जितना अलॉट किया जाता है। उससे तो पूरा खर्च भी नहीं चल पाता है। 

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प्रदूषण के कारण बढ़ा अवसाद का खतरा

अमेरिका में हुए अपनी तरह के पहले अनुसंधान में पता चला है कि वायु प्रदूषण के कारण उन स्वस्थ लोगों के अवसादग्रस्त होने की प्रबल आशंका होती है, जिनके जीन के कारण उनमें इस विकार से पीड़ित होने का खतरा पहले से होता है। 

‘पीएनएएस’ नामक पत्रिका में सोमवार को प्रकाशित एक अनुसंधान के तहत दुनिया के 40 से ज्यादा देशों से प्राप्त वायु प्रदूषण संबंधी वैज्ञानिक आकंड़ों, न्यूरोइमेजिंग, मस्तिष्क संबंधी जीन के विवरण और अन्य आंकड़ों का संयोजन किया गया। 

अमेरिका के ‘लिबर इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट’ (एलआईबीडी) के हाओ यांग टान ने बताया कि इस अध्ययन का प्रमुख बिंदु यह है कि वायु प्रदूषण से मस्तिष्क की संज्ञान लेने और भावनात्मक क्षमता पर असर पड़ता है। 

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उन्होंने कहा कि प्रदूषण से अवसाद के कारक माने जाने वाले जीन में परिवर्तन हो सकता है। हाओ ने कहा कि ऐसा अध्ययन पहले कभी नहीं किया गया। 

चीन के पेकिंग विश्वविद्यालय के सहयोग से हुए अनुसंधान का नेतृत्व करने वाले हाओ ने कहा, “अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अवसाद से ग्रस्त होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनके जीन और पर्यावरण में मौजूद प्रदूषण इस खतरे का स्तर बढ़ा सकते हैं।” 

इनपुट भाषा

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