Friday, January 16, 2026
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क्या प्रेगनेंसी में बच्चे पर प्रदूषण का असर होता है? डॉक्टर ने बताया मां और बच्चे को क्या मुश्किलें हो सकती हैं

Pollution Affect Pregnancy: वायु प्रदूषण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी असर डाल सकता है। इससे अबॉर्शन, बच्चे का समय से पहले पैदा होना और जन्म से विकलांगता भी हो सकती है। डॉक्टर से जानिए गर्भवती महिला और बच्चे को क्या खतरा होता है?

Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
Published : Jan 16, 2026 06:30 am IST, Updated : Jan 16, 2026 06:30 am IST
Pollution Affect The Baby During Pregnancy - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Pollution Affect The Baby During Pregnancy

दिल्ली एनसीआर में रहने वालों के लिए प्रदूषण स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ा मुद्दा है। हर साल लाखों लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ता है, जिससे न सिर्फ लोगों की उम्र कम हो रही है बल्कि समय से पहले फेफड़ों की बीमारियां जानलेवा साबित हो रही हैं। 30-40 साल के युवाओं में लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों पर आए काले निशान सिर्फ निशान नहीं हैं बल्कि इसमें पार्टिकल्स भी होते हैं और टॉक्सिक केमिकल भी होते हैं। ये फफड़ों के जरिए खून में जाते हैं और फिर हमारे दिमाग से लेकर पैर तक हर अंग को नुकसान पहुंचाते हैं।  

इंडिया टीवी के कॉन्क्लेव #pollutionkasolution में शामिल डॉक्टर अरविंद कुमार (चेयरमेन इंस्टिट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी, चेस्ट कैंसर सर्जरी और लंग ट्रांसप्लांटेशन, मेदांता) ने बताया, सबसे अहम बात ये है कि यह डैमेज हमारे पैदा होने का इंतजार नहीं करता है। क्योंकि एक प्रेगनेंट महिला जब प्रदूषित शहर में सांस लेती है तो ये टॉक्सिक केमिकल उसके खून में जाते हैं वही ब्लड प्लेसेंटा के जरिए बच्चे में जाता है। पहले 3 महीने में बच्चे के अंगों का विकास होता है। तो उस समय अगर महिला के शरीर में ये टॉक्सिक केमिकल जाएंगे तो ये वहां पर कंजनाइटल डिफेक्ट्स यानि जन्मजात दोष पैदा करेंगे।

गर्भवती महिलाओं पर प्रदूषण का असर

दूसरे ट्रायमेस्टर और तीसरे ट्रायमेस्टर में बच्चे की ग्रोथ होती है। इंट्रायूटरिन डेथ यानि गर्भावस्था के 20वें सप्ताह या उसके बाद, गर्भाशय के अंदर भ्रूण की मौत होना है, जो गर्भपात (abortion) से अलग है। इंट्रायूटरिन ग्रोथ रिटार्डेशन जिसमें बच्चे का सही से विकास नहीं हो पाता है और प्रीमैच्योर बेबी बर्थ जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

पैदा होते ही बच्चे के फफड़ों पर 15-20 सिगरेट पीने जितना होता है असर

अब बच्चा जब पैदा होगा और वो 350 AQI जैसी प्रदूषित हवा में सांस लेगा, तो समझ लें कि पैदा होते ही वो 15 से 20 सिगरेट पी रहा है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि वायु प्रदूषित शहर में सांस लेने वाला बच्चा पैदा होते ही स्मोकर बन गया है तो ये गलत नहीं होगा।

प्रदूषण से मां और गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकती हैं ये परेशानी  

वायु प्रदूषण कोई पर्यावरण से जुड़ा मामला नहीं है ये सिर्फ और सिर्फ आपकी हेल्थ से जुड़ा है। ये एक हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति है। जो हर साल हमें खतरनाक बीमारियां दे रही है। विकलांगता दे रही है और हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत का कारण बन रही है। हर साल प्रदूषण से मरने वालों की संख्या कोरोना महामारी में मरने वालों की संख्या से कहीं ज्यादा है। यानि एयर पॉल्युशन हर साल हमें एक कोरोना महामारी से ज्यादा मौतें दे रहा है।

 

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