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सीवर की गंदगी कोरोना विषाणु आरएनए को अपने में समाहित करने में सक्षम: शोध

 Written By: India TV Health Desk
 Published : Feb 10, 2022 11:36 pm IST,  Updated : Feb 10, 2022 11:38 pm IST

इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि क्या अधिकांश सीवर पाइपों की भीतरी तरफ पाए जाने वाले माइक्रोबियल सूक्ष्म जीवाणु इन विषाणुओं को प्रभावित कर सकते हैं।

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sewer  Image Source : FREEPIK

सीवर की गंदगी में सार्स कोविड विषाणु जमा हो सकता है जिसके विघटित होने से संभावित रूप से अपशिष्ट जल महामारी अध्ययन की सटीकता प्रभावित हो सकती है। एक शोध में यह जानकारी सामने आई है। कोविड महामारी के दौरान, अपशिष्ट शोधन संयंत्रों में आने वाले अपशिष्ट जल में सार्स कोविड के स्तर की निगरानी करना एक ऐसा तरीका रहा है जिससे शोधकर्ताओं ने बीमारी के प्रसार का अनुमान लगाया है।

इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि क्या अधिकांश सीवर पाइपों की भीतरी तरफ पाए जाने वाले माइक्रोबियल सूक्ष्म जीवाणु इन विषाणुओं को प्रभावित कर सकते हैं। जैसे-जैसे लोगों के घरों से पानी और कीचड़ सीवरों में जमा होता है उसमें से कुछ ठोस पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, और पाइपों के भीतर माइक्रोबियल बायोफिल्म बनाते हैं।

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इससे पहले के शोधों में दिखाया है कि इस कीचड़ में पोलियोवायरस, एंटरोवायरस और नोरोवायरस जैसे आरएनए वायरस फंस सकते हैं । न्यू जर्सी स्टेट यूनिवर्सिटी के निकोल फारेनफेल्ड के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पहले विश्वविद्यालय के छात्रावास के सीवर के भीतर से वायरस के आरएनए का पता लगाया था। लेकिन विषाणुओं के सटीक आकलन करने के लिए यह मात्रा बहुत कम थी।

यह शोध टीम इस बात का आकलन करना चाहती थी कि क्या कम और अधिक कोविड संक्रमण के दौरान अनुपचारित अपशिष्ट जल से इस बायोफिल्म्स में कोविड विषाणु फंस सकते हैं । शोधकर्ताओं ने एक नकली सीवर कीचड़ लाइन विकसित की और इसमें पोलिविनाइल कार्बोनेट कलोराइड के टुकडे लगाए जिन्हें हटाया जा सकता था और इसके भीतर अपशिष्ट जल को एक बेलनाकार टैंक में पंप किया।

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उन्होंने बायोफिल्म की संरचना का आकलन करने के लिए हर कुछ दिनों में पीवीसी प्लेटों को हटाते हुए 28 दिनों की अवधि में दो बार प्रयोग किए । टीम ने अनुपचारित अपशिष्ट जल और बायोफिल्म में कोविड विषाणु और पेपर मोटल वायरस (मानव मल का एक संकेतक)की प्रचुरता को मापने के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन क्वांटिटेटिव पोलीमरेज चेन रिएक्शन नामक विधि का उपयोग किया।

इनपुट - आईएएनएस

 

 

 

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