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निर्भया को न्याय: फांसीघर से श्मशान तक.. कब, क्या और कैसे?

सात साल चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार वो घड़ी भी आ ही गई, जब निर्भया के कातिलों की फांसी में फंसी हर 'फांस' गुरुवार को निकाल फेंकी गई। मतलब, शुक्रवार यानि 20 मार्च, 2020 को सुबह पांच से छह बजे के बीच निर्भया के मुजरिमों का फांसी के फंदे पर लटकना तय है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: March 20, 2020 6:27 IST
nirbhaya case- India TV Hindi
Image Source : FILE nirbhaya case

नई दिल्ली | सात साल चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार वो घड़ी भी आ ही गई, जब निर्भया के कातिलों की फांसी में फंसी हर 'फांस' गुरुवार को निकाल फेंकी गई थी। मतलब, शुक्रवार यानि 20 मार्च, 2020 को सुबह पांच से छह बजे के बीच निर्भया के मुजरिमों का फांसी के फंदे पर लटकना तय था। इस विशेष स्टोरी में पढ़िए कि आखिर, फांसी की प्रक्रिया अमल में लाए जाने के बाद कब, क्या और कैसे-कैसे हुआ?

कानून के जानकार और दिल्ली की तीस हजारी अदालत के सीनियर क्रिमिनल लॉयर सतेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक, "निर्भया के चारों मुजरिमों को ब-हुक्म देश की अदालत सजा-ए-मौत मुकर्रर की गई है। फिर भी हिंदुस्तानी कानून के नजरिये से ये मौतें 'कस्टोडियल-डेथ' (हिरासत में हुई मौत) मानी जाएंगी। हिरासत में मौत भी तिहाड़ जेल प्रशासन की हिरासत में मानी जाएगी।"

राष्ट्रीय राजधानी के वरिष्ठ वकील शैलेंद्र के मुताबिक, "तीन-चार साल पहले तक हिरासत में मौत के मामले में जांच/इंक्वेस्ट पेपर इलाका एसडीएम द्वारा पोस्टमॉर्टम करने वाले एक्सपर्ट या पैनल के सामने दाखिल किए जाते थे। कुछ साल पहले सीआरपीसी की धारा-176 में हो चुके आंशिक बदलाव के बाद अब ऐसा नहीं होगा।"

राष्ट्रीय राजधानी की सबसे पुरानी व बड़ी मॉर्च्यूरी के प्रमुख फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. एल.सी. गुप्ता ने गुरुवार को को बताया, "सीआरपीसी में हुए बदलाव के बाद अब निर्भया के हत्यारों के शवों को पोस्टमॉर्टम हाउस भिजवाने की जिम्मेदारी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट यानि एमएम की होगी। फांसीघर में मौजूद डॉक्टर निर्भया के मुजरिमों को कानूनी तौर पर लिखित में 'मृत' घोषित करेगा। उसके बाद चारों के शव मौके पर मौजूद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कानूनन (एमएम) अपने कब्जे में ले लेंगे। एमएम ही चारों शव का पंचनामा भरेंगे। उसके बाद सीलबंद शव संबंधित पोस्टमॉर्टम पैनल (पोस्टमॉर्टम हाउस) तक पहुंचाने/पहुंचवाने की जिम्मेदारी भी एमएम की ही होगी। मतलब, इस पूरी अंतिम और कानूनी प्रक्रिया में उस तिहाड़ जेल प्रशासन का कोई रोल या हस्तक्षेप नहीं होगा, जिसने मुजरिमों को करीब 7-8 साल अपने यहां सलाखों में कैद करके सुरक्षित रखा।"

देश के वरिष्ठ फॉरेंसिक साइंस विशेषज्ञ डॉ. एल.सी. गुप्ता ने आगे कहा, "चूंकि एमएम न्यायिक सेवा के प्रतिनिधि होते हैं, ऐसे में उनका अधिकार है कि वे खुद भी पोस्टमॉर्टम पैनल गठित कर लें। इसके बाद दूसरा विकल्प है कि दिल्ली के उप-राज्यपाल के जरिये सचिव (स्वास्थ्य सेवा) भी चारों के शवों के पोस्टमॉर्टम के लिए फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स का पैनल गठित कर दें।"

डॉ. गुप्ता के मुताबिक, "पोस्टमॉर्टम के दौरान पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाएगी। चारों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स की एक-एक प्रतिलिपि एमएम पैनल में शामिल फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी जाएगी।"

जहां तक सवाल फांसी के बाद दिल्ली पुलिस की भूमिका का है, के बारे में पूछे जाने पर कानून के विशेषज्ञ और पटियाला हाउस अदालत के वरिष्ठ वकील शैलेंद्र ने आईएएनएस से कहा, "पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी होने पर एमएम के आदेश पर दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी होगी कि शवों को संबंधित परिवार/पक्षों की कानूनन सुपुर्दगी में देना। फांसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अंतिम समय में उस दिल्ली पुलिस की भी कोई बड़ी भूमिका होगी, जिसकी पैरवी पर देश की अदालत ने मुजरिमों को सजा-ए-मौत मुकर्रर की। (आईएएनएस)

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