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अर्जुन मुंडा की सरकार गिराई और सीएम बने थे हेमंत, फिर भाजपा से दोस्ती या अफवाह, क्यों मचा है बवाल?

हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली पहुंचे और खबर आने लगी कि झारखंड में बड़ा सियासी बदलाव सामने आने वाला है। भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है। क्या ये दोस्ती होगी या महज अफवाह है, जानें....

Written By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Dec 03, 2025 02:02 pm IST, Updated : Dec 03, 2025 02:02 pm IST
हेमंत सोरेन- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO (DDNEWS) हेमंत सोरेन

बिहार से अलग हुए झारखंड की राजनीति वैसे तो बिहार से इतर है लेकिन आज वहां भी सियासी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन अभी प्रदेश के सीएम हैं और वहां सत्ता अभी तक ठीकठाक चल रही थी लेकिन हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन किसी काम से दिल्ली दौरे पर हैं और दोनों पति पत्नी के गुपचुप तरीके से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात होने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और गृहमंत्री अमित शाह की मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई है। इन सबको देखते हुए झारखंड में राजनीतिक फेरबदल की आशंकाओं को बल मिलता दिख रहा है।

दिल्ली पहुंचे हेमंत, झारखंड में बचा बवाल

दिल्ली में हेमंत सोरेन को लेकर तरह तरह की अटकलें लग रही हैं..लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे पूरी तरह खारिज कर रही है.....JMM सांसद महुआ माझी ने कहा कि जब हेमंत सोरेन को जेल में डाला गया..उस मुश्किल हालात में वो जेल में नहीं गए...तो अभी बीजेपी से हाथ क्यों मिलाएंगे। किसी का मुंह नहीं रोका जा सकता। कोई कारण बनाएं गठबंधन क्यों टूटेगा, गठबंधन की दूर तक संभावना नहीं, गठबंधन सरकार कार्यकाल पूरा करेगी।

जेएमएम और भाजपा ने क्या कहा

 

जेएमएम ही नहीं, झारखंड के भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव भी लगातार कह रहे हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा समंदर के दो किनारे हैं, जो कभी नहीं मिल सकते। साथ गठबंधन का तो सवाल ही नहीं उठता। जेएमएम के प्रवक्ता कुणाल सारंगी भी जेएमएम के एनडीए में जाने की अटकलों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। लेकिन सियासत है, इसमें कब कौन दोस्त और कब कौन दुश्मन हो जाए, कहा नहीं जा सकता। 

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने झारखंड में सत्ता परिवर्तन के तमाम अटकलें को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भाजपा के आगे नहीं झुकेंगे। उनमें हिम्मत है। उनके ही नेतृत्व में झारखंड में महागठबंधन की सरकार चलेगी। सत्ता परिवर्तन की अफवाह उड़ने वाली भाजपा अफवाहों की हेड मास्टर है। केंद्र अगर झारखंड को अपनी राशि नहीं देती है तो यह राज्य अन्य स्रोतों से राजस्व जुटाने में सक्षम है।

भाजपा और जेएमएम जो भी कहे, सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा तेज है और लोग कह रहे हैं कि झारखंड में जब सब ठीक चल रहा है तो जेएमएम जैसी पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में कैसे जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि ऐसा संभव क्यों नहीं हो सकता। भाजपा की सरकार में ही हेमंत सोरेन पहली बार झारखंड के उपमुख्यमंत्री बने थे। ये भी याद कर लेना चाहिए।

पहली बार चुनाव हारे हेमंत सोरेन, दूसरी बार मिली जीत

 

बता दें कि ये बाद साल 2005 की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन के मंझले बेटे हेमंत सोरेन बीआईटी मेसरा में पढ़ाई कर रहे थे। तब शिबू सोरेन के बड़े बेटे यानी हेमंत सोरेन के बड़े भाई की हत्या हो गई जिससे हड़कंप मच गया था और सोरेन परिवार में उथल पुथल मच गई थी। हेमंत बीच में ही पढ़ाई छोड़कर घर लौट आए थे और पिता के साथ राजनीति का हिस्सा बनने लगे थे। पिता शिबू सोरेन ने हेमंत सोरेन को पहली बार 2005 में दुमका सीट से विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा और हेमंत सोरेन अपना पहला चुनाव जेएमएम के बागी स्टीफन मरांडी से हार गए।

अर्जुन मुंडा की सरकार गिराई, हेमंत बने सीएम

पहली बार हारने के बाद साल 2009 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने दोबारा राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई और दूसरे प्रयास में उन्हें जीत मिली। जीत मिलने के बाद बीजेपी और जेएमएम के बीच खींचतान चलती रही और राज्य में दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। फिर जेएमएम और भाजपा में सहमति बनी और 2010 में बीजेपी और जेएमएम के गठबंधन की सरकार बनी। अर्जुन मुंडा सीएम बने और हेमंत सोरेन पहली बार उपमुख्यमंत्री बने।

भाजपा से दोस्ती तोड़ी, कांग्रेस का लिया साथ

भाजपा और जेएमएम की दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चली कुछ ही महीने बाद हेमंत सोरेन ने सपोर्ट खींच लिया और अर्जुन मुंडा की सरकार को गिरा दिया। बीजेपी ने तब आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की तरफ से अर्जुन मुंडा की सरकार गिराने के चलते राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया। इसके बाद हेमंत सोरेन ने कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाई और 13 जुलाई 2013 को हेमंत सोरेन ने झारखंड के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 

हेमंत का दिल्ली दौरा, मचा है बवाल

बतौर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पहला कार्यकाल 13 जुलाई 2013 से 28 दिसंबर 2014 तक ही चल सका और साल 2014 में हुए विधानसभा में हेमंत सोरेन की हार हुई और बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। हालांकि उसके बाद 2019 और 2024 में लगातार दो चुनावों में हेमंत सोरेन की अगुवाई में जेएमएम और कांग्रेस, राजद के गठबंधन की सरकार बनी फिलहाल वे मुख्यमंत्री हैं। लेकिन उनके दिल्ली जाने के बाद तमाम तरह की कयासबाजी जारी है।

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