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Rajat Sharma's Blog | पहाड़ में फटे बादल : क़ुदरत की आवाज़ सुनो

 Published : Aug 15, 2025 03:10 pm IST,  Updated : Aug 15, 2025 03:10 pm IST

अगर हम प्रकृति से टकराएंगे, खिलवाड़ करेंगे तो एक न एक दिन ये कहर बनकर टूटेगा। अगर पहाड़ों को काटेंगे, नदियों का रास्ता रोकेंगे, पेड़ काटेंगे तो एक दिन पानी और मलबा सब कुछ बहा कर ले जाएगा और तबाही के मंज़र से कोई नहीं बचा पाएगा।

Rajat sharma, INDIA TV- India TV Hindi
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में भयानक हादसा हुआ। बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आने से भारी तबाही हुई। अब तक CRPF के दो जवान समेत 60 लोगों की मौत हो चुकी है। 120 से ज्यादा घायल हैं। करीब ढ़ाई सौ लोग लापता हैं। 167 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। किश्तवाड़ ने सौ किलोमीटर दूर चिशोटी में घर, मकान, दुकान, सड़क और पुल सब बह गये। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है क्योंकि जिस इलाके में बादल फटा है, उस इलाके में मचैल माता यात्रा के लिए करीब एक हज़ार श्रद्धालु इकट्ठे हुए थे। इनमें से सैकड़ों लापता हैं।

लगातार बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें पेश आ रही हैं। हेलीकॉप्टर उड़ नहीं सकते, रास्ते बह गए हैं,  एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पतालों  तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला को फोन पर आश्वासन दिया कि सरकार हरसंभव मदद करेगी। पहाड़ी राज्यों में बारिश के मौसम में अब प्राकृतिक आपदाओं की मार बढ़ी है। गुरुवार को हिमाचल के कई इलाकों में बादल फटे। पिछले 24 घंटे में शिमला,  कुल्लू, लाहौल स्पीति से लेकर किन्नौर तक भारी बारिश हुई और बाढ आई,  जिसकी वजह से घर, दुकान, गाड़ियां बह गईं।

पिछले पांच साल में जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में  बादल फटने की जितनी घटनाएं हुई है, उससे दुगुनी घटनाएं पिछले दो महीने में हो चुकी हैं। इसलिए ये चिंता की बात है। सरकार ने हि्मालय के पहाड़ों में बादल फटने के बढ़ते मामलों की वजह पता लगाने के लिए पांच वैज्ञानिकों की एक कमेटी बनाई है। मुझे लगता कि किश्तवाड़ में जो सैलाब आया वो चेतावनी है प्रकृति की। हिमाचल में जो बादल फटा वो चेतावनी है कुदरत की।

   
अगर हम प्रकृति से टकराएंगे, खिलवाड़ करेंगे तो एक न एक दिन ये कहर बनकर टूटेगा। अगर पहाड़ों को काटेंगे, नदियों का रास्ता रोकेंगे, पेड़ काटेंगे तो एक दिन पानी और मलबा सब कुछ बहा कर ले जाएगा और तबाही के मंज़र से कोई नहीं बचा पाएगा। हमने उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू कश्मीर का हाल देख लिया। अपने लोगों को खो दिया। बर्बादी का ये मंजर भी अगर आंखें नहीं खोलता तो प्रकृति इसे फिर दोहराएगी। अगर अब भी हमने सबक नहीं सीखा तो अगली बार तबाही और जोरों से आएगी।

 दिल्ली के खोखले पेड़ों को तत्काल हटाओ

दिल्ली के कालकाजी इलाके में गुरुवार को बारिश के कारण नीम का एक पुराना पेड़ गिरा और उसके नीचे दबकर एक शख्स सुधीर कुमार की मौत हो गई। सुधीर कुमार अपनी 22 साल की बेटी को बाइक पर बैठा कर ऑफिस जा रहे थे। उस वक्त तेज बारिश हो रही थी, सड़क पर पानी भरा था, ट्रैफिक धीमी रफ्तार में था। सुधीर कुमार ने जैसे ही एक गाड़ी को ओवरटेक किया, उसी वक्त सड़क के किनारे लगा नीम का एक  पुराना पेड़ बाइक पर गिर पड़ा। 

सुधीर कुमार और उनकी बेटी इस पेड़ के नीचे दब गए। एक कार भी पेड़ की चपेट में आ गई। लोगों ने पेड़ के नीचे दबे पिता और उसकी बेटी को बचाने की पुरज़ोर कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फायर ब्रिगेड की टीम ने पेड़ को काट कर सुधीर और उसकी बेटी को निकाला, लेकिन तब तक सुधीर की सांसे थम चुकी थीं,  प्रिया सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी के लिए लड़ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अफसरों से दिल्ली के सभी पुराने पेड़ों के हालात की जांच करने को कहा है और जो पेड़ कमजोर और खोखले हो गए हैं,उन्हें तुरंत हटाने का आदेश दिया।

दिल्ली में जिस पेड़ ने एक बेकसूर नागरिक की जान ली, वो गिरने के कगार पर था। दिल्ली में सड़कों के किनारे लगे ज्यादातर पेड़ पुराने हो चुके हैं। जिन पेड़ों के आसपास concrete की सड़कें या पटरियां बन गई हैं, वो खोखले हो चुके हैं। कई जगह cabling की वजह से पेड़ कमजोर हो गए हैं। लेकिन दिल्ली वृक्ष संरक्षण कानून (Delhi Preservation of Trees Act), 1994 के मुताबिक, Tree Officer की इजाज़त के बगैर न तो कोई पेड़ काटा जा सकता है,  न उसे हटाया जा सकता है। कानून के डर से सरकारी अधिकारी पेड़ों को हाथ लगाने से भी डरते हैं। इस वजह से पेड़ गिरते हैं लेकिन इसी कानून में emergency cases के लिए एक प्रावधान है। अगर कोई पेड़ जानलेवा बन जाए, property या traffic के लिए खतरा बन जाए तो उसे गिराया जा सकता है।
    
अब दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इसी आपातकालीन प्रावधान का इस्तेमाल करके, खतरनाक पेड़ों की तुरंत पहचान करके, उन्हें हटाने का आदेश दिया। अच्छा किया। पर क्या ये फैसला अधिकारियों को पहले नहीं लेना चाहिए था ? अधिकारियों ने इस emergency power का इस्तेमाल क्यों नहीं किया ? जो इस मौत के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ क्या कदम उठाया जाएगा? (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 14 अगस्त, 2025 का पूरा एपिसोड

 

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