Tuesday, February 17, 2026
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देसी खाने का स्वैग, ये डिशेज जो ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में खाये जाते थे, आज बन चुका है शाही भोजन, शौक से खाते हैं लोग

Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth Published : Feb 17, 2026 08:44 am IST, Updated : Feb 17, 2026 10:37 am IST

These Food Were Consider As Poor Man Food: कभी गांव देहात में जो खाना खाया जाता था अब वो चीजें शाही भोजन बन चुकी हैं। बड़े बड़े होटल और रेस्टोरेंट में इन डिश को लोग शौक से खाते हैं।

देसी खाना - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK देसी खाना

देसी खाने का स्वाद और खुशबू ही अलग होती है। कभी देसी खाने को सिर्फ गांव देहात के लोग खाते थे, लेकिन अब ऐसी कई लोकल डिश प्रीमियम फूड बन चुकी हैं। बड़े बड़े रेस्टोरेंट्स के मेनू में शामिल ऐसे कई व्यंजन हैं जो कभी जरूरत, कमी और सूझबूझ से तैयार किए गए थे। इन्हें किसानों, मजदूरों और घरेलू रसोइयों ने बनाया था। बड़ी सिंपल सामग्री के साथ इसमें स्वाद और जरूरी पोषक तत्वों को शामिल कर तैयार किया गया था। इसमें लिट्टी चोखा लेकर कांजी वड़ा और दाल मखनी तक शामिल हैं। जानिए कैसे गांव देहात का खाना आज बह चुका है शाही भोजन।

गांव का देसी खाना बना शाही भोजन 

दाल मखनी- लज़ीज व्यंजन की लिस्ट में दाल मखनी का नाम भी आता है। कभी ये दाल पंजाब के किसानों का खाना हुआ करती थी। जिसमें साबुत काली दाल और राजमा डालकर इसे धीमी आंच पर पकाया जाता था। इससे दिनभर काम करके लौटे किसानों का पेट आसानी से भर जाता था और भरपूर प्रोटीन मिलता था। पहले इसमें मलाई और मक्खन इतना नहीं डाला जाता था। लेकिन अब इसे रेस्टोरेंट्स में क्रीमी बनाकर परोसा जाता है, जिसे लोग बड़े स्वाद से खाते हैं।

लिट्टी चोखा- अब बात करते हैं लिट्टी चोखा की जो कभी बिहार और यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों का खाना हुआ करता था, लेकिन आज ये हर जगह मिल जाएगा। ये काफी किफायती भोजन है। गेहूं के आटे की बाटियों जिनमें सत्तू भरकर तैयार किया जाता है। गांव में चूल्हे की आग में इन्हें सेंककर बनाया जाता था। साथ ही मसली हुई भुनी सब्जियों का चोखा बनाकर इसे खाते थे। अब यही लिट्टी चोखा खाद्य पर्यटन और क्षेत्रीय गौरव के कारण राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो गया है। 

खिचड़ी- खिचड़ी आसानी से बन जाने वाली और सुपाच्य डिश है। कभी इसे किसान लोग खाना ज्यादा पसंद करते थे। घंटों खेतों में काम के बाद सदियों में जब बहुत देर तक खाना पकाने का मन नहीं होता तो लोग खिचड़ी बनाकर खाते थे। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता था और कम खर्च में मेहनत में आसानी से पेट भर जाता था। अब खिचड़ी को सुपरफूड की लिस्ट में शामिल किया जाता है। 

रागी मुड्डे- कर्नाटक और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में रागी मुड्डे पारंपरिक रूप से किसानों का भोजन था। रागी किफायती, पौष्टिक और लंबे समय तक पेट फुल रखने वाला अनाज है। इसे सांभर और मसालेदार ग्रेवी के साथ खाते हैं। मजदूर लोग इसे खाकर दिनभर काम करने की शक्ति पाते थे। लेकिन अब इसे बड़े बड़े रेस्टोरेंट्स में भी सर्व किया जाता है। रागी सुपरफूड की लिस्ट में शामिल है और सेहत को लेकर जागरुक रहने वाले इसे अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं।

मक्की की रोटी और सरसों का साग- पंजाब के गांव का मशहूर खाना था मक्की की रोटी और सरसों का साग, लेकिन अब इसे लोग होटल और रेस्टोरेंट्स में भी खाते हैं। किसानों के खेत में मक्का की फसल हुआ करती थी और सरसों की खेती होती थी। इसी से वो अपना पेट भरते थे। ठंड होने की वजह से मक्के की रोटी और सरसों का साग शरीर को गर्म रखने में मदद करता है।

पखाला भात- ओडिशा में पखाला भात पानी में भिगोए हुए फर्मेंटेड चावल से बनता है और इसे नमक, मिर्च या किसी साइड डिश के साथ सर्व किया जाता है। खेतों में काम करने वाले लोग गर्मियों में इसका सेवन करते थे। जिससे पेट को ठंडक मिलती थी। साथ ही ये रात के बचे हुए चावलों का अच्छा इस्तेमाल था। अब फर्मेंटेड फूड खाना लोगों की पसंद बनता जा रहा है। 

कांजी वड़ा- उत्तर भारत में त्योहारों पर लोग कांजी वड़ा खाते हैं। इसमें दाल से तैयार किए गए पकौड़ों को फर्मेंटेड सरसों के पानी में भिगोया जाता है। बिना फ्रिज के लंबे समय तक रखने के लिए इन्हें फर्मेंट करके संरक्षित किया जा सकता है। इसे अपन शेफ अपनी शाही डिश में शामिल कर चुके है। गट हेल्थ के लिए अच्छा माना जाने वाला ये भोजन लोगों की पसंद बनता जा रहा है। इसमें नेचुरल प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं।

मिसल पाव- कभी महाराष्ट्र में मजदूरों के लिए मिसल पाव तैयार किया जाता था। ये एक सस्ता स्ट्रीट फूड है, जिसे खाने से आसानी से पेट भर जाता है। मसालेदार ग्रेवी में पकी हुई अंकुरित दाल और ऊपर से फरसान डालकर बनाया गया मिसल पाव कम लागत में स्वाद और पोषण से भरपूर है। अब मिसल पाव को लोग शहरों में लोग शौक से खाते हैं।

 

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