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दंगाइयों को उकसा रहे हैं राज्यपाल त्रिपाठी: तृणमूल

 Written By: IANS
 Published : Jul 06, 2017 08:36 am IST,  Updated : Jul 06, 2017 08:36 am IST

चटर्जी ने कहा कि अतीत में विपक्ष के नेता के रूप में और अब एक राज्य मंत्री के तौर पर उन्होंने तीन राज्यपालों को करीब से देखा है। चटर्जी ने कहा, "मैंने कभी किसी राज्यपाल से इस तरह के व्यवहार की आशा नहीं की। जिस टोन में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से बात की

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के साथ विवाद को बढ़ाते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को उन पर 'भाजपा कैडर' की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया। तृणमूल ने आरोप लगाया कि राजभवन उन लोगों को 'मदद व उकसावा' दे रहा है जो राज्य में सत्ता पाने के लिए कई भागों में दंगे कराने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिपाठी पर कड़ा हमला करते हुए तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी ने राज्यपाल त्रिपाठी को चेताया कि यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला किया जाता है तो उनकी पार्टी चुप नहीं रहेगी। ये भी पढ़ें: भारत और चीन में बढ़ी तल्खियां, जानिए किसके पास है कितनी ताकत

चटर्जी ने कहा कि अतीत में विपक्ष के नेता के रूप में और अब एक राज्य मंत्री के तौर पर उन्होंने तीन राज्यपालों को करीब से देखा है। चटर्जी ने कहा, "मैंने कभी किसी राज्यपाल से इस तरह के व्यवहार की आशा नहीं की। जिस टोन में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से बात की, वो इस तरह का था कि मानों वह (ममता बनर्जी) उनकी कोई मातहत कर्मचारी हों।"

उन्होंने कहा, "क्या राज्यपाल भाजपा के प्रवक्ता हैं? वह एक वकील हैं। क्या उन्हें अपनी शक्तियों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के बारे में नहीं पता है? हम उनके मुख्यमंत्री से बात करने के टोन, तरीके व धमकी देने की कड़ी निंदा करते हैं। इससे ममता बनर्जी को काफी पीड़ा हुई है।"

चटर्जी पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री भी है। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने इस बारे में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखा है। पत्र की एक प्रति गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी दी गई है। उन्होंने कहा, "तृणमूल व तृणमूल विधायक दल राज्यपाल को याद दिलाना चाहते हैं कि राजभवन भाजपा का अड्डा नहीं हो सकता।" मंत्री ने राजभवन के इस बयान का भी उपहास किया कि राज्यपाल व मुख्यमंत्री के बीच की बातचीत को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "संघर्ष रोकने में मदद करने के बजाय वह (राज्यपाल) सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि बातचीत को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा प्रतिनिधियों से बात करने के बाद उन्होंने उन्हें (ममता बनर्जी) को फोन किया। हमने उन्हें केंद्र सरकार से वित्तीय अनुदान जैसे कई दूसरे मुद्दों पर सुझाव दिए हैं, लेकिन उन्होंने कभी मुंह नहीं खोला।"

उन्होंने कहा, "राजभवन उन लोगों को मदद व उकसावा दे रहा है जो राज्य के कई भागों में सत्ता पाने के लिए दंगे करवाने की कोशिश कर रहे हैं। वह भाजपा के कैडर की तरह व्यवहार कर रहे हैं। भाजपा कानून व्यवस्था बिगाड़ना चाहती है।" उन्होंने कहा, "यदि ममता बनर्जी पर हमला किया जाता है तो तृणमूल कांग्रेस चुप नहीं रहेगी।"

यह विवाद मंगलवार को शुरू हुआ जब राज्यपाल व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच उत्तर 24 परगना जिले बदुरिया में सांप्रदायिक हिसा को लेकर तीखी बातचीत टेलीफोन पर हुई। इसके बाद तुरंत ममता ने त्रिपाठी पर हमला बोला। ममता ने त्रिपाठी पर अपमानित करने व धमकी देने का आरोप लगाया। राजभवन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की और ममता के 'व्यवहार व भाषा' को लेकर आश्चर्य जताया।

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