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'हम किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन अगर कोई...', महाराणा प्रताप जयंती पर पीएम मोदी का संदेश

 Written By: Subhash Kumar @ImSubhashojha
 Published : May 09, 2024 09:24 am IST,  Updated : May 09, 2024 10:16 am IST

पीएम मोदी ने महाराणा प्रताप की जयंती पर वीडियो संदेश जारी किया है। आपको बता दें कि महाराणा प्रताप को भारत में वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है।

महाराणा प्रताप की जयंती पर पीएम मोदी का संदेश।- India TV Hindi
महाराणा प्रताप की जयंती पर पीएम मोदी का संदेश। Image Source : PTI

मातृभूमि व स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले भारत के शूरवीर योद्धा महाराणा प्रताप की आज 9 मई को जयंती है। पूरे देश में उनके सम्मान में आज कई समारोह आयोजित किए जाएंगे। ये महाराणा की वीरता ही थी कि करीब 500 सालों बाद भी वह भारत के लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। महाराणा की जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके सम्मान में देश को जोशीला संदेश जारी किया है। पीएम ने साफ कहा है कि हम सभी महाराणा की परंपरा को मानने वाले लोग हैं। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने और क्या कुछ कहा है। 

पीएम मोदी ने जारी किया वीडियो संदेश

पीएम मोदी ने महाराणा प्रताप की जयंती पर वीडियो संदेश जारी किया है। इस वीडियो में पीएम मोदी ने कहा- उस नाम में क्या जादू होगा उस व्यक्तित्व में क्या ताकत है कि आज भी महाराणा प्रताप का नाम लेते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो कैसा जीवन जी गए होंगे, किस प्रकार से जीवन को खपाया होगा कि 400 साल के बाद भी राणा प्रताप का नाम लेते ही जवानी उमड़ पड़ती है। वो कौन सा सामर्थ्य है, वो जीवन कि कौन सी आहूति है जो आज भी हमें प्रताप दे रही है। आगे का मार्ग प्रशस्त कर रही है। हमें ये सोचना होगा कि क्या कारण है कि महाराणा प्रताप का नाम लेते सिर झुकाने का मन करता है। हम उस परंपरा के हैं जो किसी को छेड़ते नहीं लेकिन किसी ने छेड़ा तो उसे छोड़ते भी नहीं। घास की रोटी खा सकते हैं लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकते है। ये संस्कार महाराणा प्रताप ने हमें दिए हैं।

जानें महाराणा प्रताप के बारे में

महाराणा प्रताप मेवाड़ के राणा उदय सिंह और महारानी जयवंता बाई के पुत्र थे। उनका जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ के किले में हुआ था। साल 1572 में अपने पिता की मृत्यू के बाद महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की राजगद्दी संभाली थी। इसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक मुगलों और अकबर की सेना से लोहा लिया था। एक वक्त ऐसा भी आया था जब महाराणा प्रताप को जंगल में रहना पड़ा था। उन्होंने घास की रोटी खाई थी लेकिन अकबर के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया था। 

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