सर्दियों की ठिठुरन में गरम-गरम पहाड़ी भोजन का अपना ही मज़ा होता है। ऐसे मौसम में अगर थाली में कुमाऊँ की मशहूर डिश ‘पालक कापा परोसी जाए, तो उसके खास स्वाद और पौष्टिकता से दिल और शरीर दोनों गर्माहट से भर जाते हैं। यह रेसिपी कुमाऊँ के सबसे लोकप्रिय डिश में से एक है। पालक कापा को कई मसालों के साथ पकाया जाता है। यह गाढ़ा और तीखा होता है जो उबले हुए चावल, रोटी या पराठे के साथ बहुत अच्छा लगता है। चलिए, जानते हैं इसकी आसान और पारंपरिक विधि?
कापा बनाना बहुत आसान है और इसे बनाने के लिए बहुत कम सामग्री की आवश्यकता होती है। इस व्यंजन को बनाने की विधि इस प्रकार है:
पालक के पत्तों को धोकर बारीक काट लें। (आप पालक के पत्तों के साथ में सरसों के पत्ते, मूली के पत्ते या चौलाई के पत्ते जैसी अन्य हरी सब्जियाँ भी इस्तेमाल कर सकते हैं।)
एक कड़ाही में सरसों का तेल गरम करें और उसमें जीरा और सूखी लाल मिर्च डालें। कुछ सेकंड के लिए इन्हें चटकने दें। हींग डालें और कुछ सेकंड के लिए और भूनें। (आप तड़के में थोड़ा लहसुन, अदरक या प्याज डालकर स्वाद बढ़ा सकते हैं।)
कटी हुई सब्ज़ियाँ डालें और उनके गलने तक भूनें। साग पर थोड़ा चावल का आटा, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और पानी छिड़कें और अच्छी तरह मिलाएँ। (आप ज़्यादा खुशबू के लिए गरम मसाला या धनिया पाउडर भी डाल सकते हैं।)
तेज़ आँच पर तब तक पकाएँ जब तक चावल का आटा अतिरिक्त पानी सोख न ले और ग्रेवी गाढ़ी न हो जाए। कटे हुए हरे धनिये से सजाएँ और गरमागरम परोसें।
पालक कापा के स्वास्थ्य लाभ:
कापा न केवल स्वादिष्ट है बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी है। इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे- पालक विटामिन K, विटामिन A, मैंगनीज़, फोलेट, मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, विटामिन B2, विटामिन B6, विटामिन E, कैल्शियम, पोटैशियम और विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है। यह रक्त संचार में सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने, एनीमिया को रोकने, हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और दृष्टि की रक्षा करने में मदद करता है।
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